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    भूकंप कैसे और क्यों ?
         इस विषय में विश्व वैज्ञानिक समुदाय अभी तक इस पूर्वाग्रह से बाहर नहीं निकल पाया है कि भूकंप का कारण पृथ्वी के अंदर भरी गैसें हैं उनके दबाव से भूमिगत प्लेटों में आने वाले विकारों के कारण आते हैं भूकंप संभवतः उन्हें लगता है कि भूकंप पृथ्वी की समस्या है इसलिए इसके विषय में हमें कोई भी जानकारी केवल पृथ्वी ही दे सकती है इसलिए भूकंपों के आने का कारण केवल पृथ्वी के ही अंदर खोजा जाना चाहिए यहीं निकलेगा हमारी भूकंपीय शंका का समाधान !इस विषय में पृथ्वी के अलावा कहीं और ताकने झाँकने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है !इसी भावना से उनका अभी तक का विचार तो यही लगता है कि पृथ्वी के अंदर बढ़ते गैस भंडार से धरती के नीचे की प्लेटों पर बढ़ते गैसों के दबावों  के कारण आता है भूकंप !उनके द्वारा दूसरे संकेत कोयना जैसे जलाशयों के निर्माण एवं उसमें जल भरने की ओर दिए गए हैं संभवतः उन्हें लगता है कि इनके भार से आता है भूकंप !कुल मिलाकर पृथ्वी के ऊपर से पड़ने वाले वजन का दबाव हो या पृथ्वी के  अंदर से बढ़ते गैसों का दबाव ऐसे दबावों के कारण भूमिगत प्लेटों में आते विकार उसी से आता है भूकंप !
         इसी भावना से भावित होकर भूकंपों के आने के कारण पृथ्वी के अंदर खोजे जाने लगे धरती के अंदर गहरे गहरे छिद्र किए जाने लगे जिसमें कुछ विचारकों ने तो यहाँ तक कहा है कि पृथ्वी की ऊपरी सतह से अंदर अधिक गहराई तक यदि कुछ गहरे छेद कर दिए जाएँ तो  धरती के अंदर की गैसें उन्हीं से बाहर निकलती रहेंगी तो पृथ्वी के अंदर का दबाव घटता रहेगा और यदि ये विधा काम आई तो वहाँ हमेंशा हमेंशा के लिए भूकंपों का भय समाप्त हो सकता है और ऐसे क्षेत्रों को भूकंप मुक्त क्षेत्र  घोषित किया जा सकता है !ऐसे दावों  में सच्चाई कितनी होगी मुझे ये तो पता नहीं है किन्तु ऐसे विचारों से मुझे भी इतना लालच अवश्य लगा कि यदि किसी भी प्रकार से ऐसा कर पाना संभव  हो सके तो जो बहुत दिनों से मैं भी सुनता आ रहा हूँ  "हिमालय के नीचे गैसों का बहुत बड़ा भंडार है जिसके कारण कभी कोई भीषण भूकंप आ सकता है !" तो ऐसे स्थलों की गैसों को निकालने का प्रबंध यथाशीघ्र किया जाना चाहिए !
         निजी तौर पर इस विषय में मुझे जो जानकारी है वो कितनी प्रमाणित है यह कह पाना अभी मेरे लिए कठिन है किंतु मैं यहाँ  उद्धृत करना चाहता हूँ कि संभवतः इसी भावना से कुछ क्षेत्रों में ऐसे प्रयास किए भी गए  किंतु उनके परिणाम स्वरूप उससे क्या अनुभव मिले और उससे भूकंपों के संदर्भ में चलाए जा रहे शोध कार्यों  में क्या कोई नई कड़ी जोड़ी जा सकी या नहीं मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है इतना अनुमान अवश्य है कि खोदे गए उन गहरे गड्ढों से यदि भूकंपों का रहस्य सुलझने की थोड़ी भी उम्मींद बँधी होती तो भूकम्पों के शोध में लगे विश्व वैज्ञानिक उसी दिशा में विश्वास पूर्वक बढ़ चले होते !किसी कारण यदि ऐसा न भी संभव हो पाता तो भूकंपीयशोध क्षेत्र में कम से कम उन देशों ने तो ऐसा कोई कीर्तिमान स्थापित किया ही होता !जैसा कि अभी तक तो कुछ दिखाई सुनाई नहीं दिया है यथा - 
       "कोला प्रायद्वीप पर सोवियत संघ की एक वैज्ञानिक वेधन परियोजना के अंतर्गत पृथ्वी की पर्पटी पर किया गया उस समय का सबसे गहरा वेधन था। एक केंद्रीय छेद से शुरु करके उसके चारों ओर उसकी शाखाओं के रूप में कई छिद्र वेधे गये।जिसकी गहराई 12262 मीटर अर्थात 40230 फुट थी !बताया जाता है कि पृथ्वी पर मानववेधित ये सबसे गहरा छिद्र था।2008 में कतर में तेल कूप बना जिसकी गहराई 12,289 मीटर अर्थात 40.318 फुट थी |  2011 में रूसी द्वीप सखालिन में अपतटीय वेधन द्वारा निर्मित 12,345 मीटर अर्थात 40.502 फुट गहराई तक वेधन किया गया !"
     ऐसे गंभीर भूवेधित छिद्रों को करने का उद्देश्य क्या रहा होगा वो तो वही जानें उन्हें उस गड्ढे को इतनी गहराई तक ले जाने में क्या कुछ अनुभव हुए वो उन्हें ही पता होंगे किंतु ये बात सबको पता है कि उन गड्ढों के अंदर कहीं कुछ पता लगा क्या ?
        बताया जाता  है कि भूकंपों का अध्ययन करने के लिए कुछ अन्य देश भी पृथ्वी की पर्पटी पर गंभीर वेधन करना प्रारंभ कर चुके हैं या करने जा रहे हैं किंतु अनेकों अनुभवों से ऐसा कहा जा सकता है कि ऐसी प्रक्रिया का सहारा लेना कहीं कुछ न करने की अपेक्षा कुछ करते हुए दिखना तो नहीं है !यदि ऐसा नहीं है तो ऐसी परियोजनाओं को प्रारम्भ  करने के आधारभूत मिले कारणों को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि पृथ्वी के अंदर ऐसे छिद्र करने की प्रेरणा उनके मन में कैसे पैदा हुई इसके लिए आधार भूत जानकारी उनके पास क्या थी जिसके कारण उन्हें ऐसे भारी भरकम कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ा !
    
  भूकंपों का अध्ययन वैदिक विज्ञान की दृष्टि से -
    समुद्र में उठने वाली लहरों का कारण - समुद्र की लहरें उठने का कारण जल का स्वभाव है या वायु का प्रभाव है समुद्र जल का कमाल है या फिर सूर्य चंद्र के आकर्षण के कारण या कुछ और !यदि ये केवल जल और चंद्र के आपसी गुरुत्वाकर्षण के कारण हैं तो इस आकर्षण का असर पृथ्वी पर स्थित अन्य जलाशयों में भी होना चाहिए था !छोटे जलाशयों में न सही तो बड़े में तो अवश्य होना ही चाहिए था अधिक न होता तो थोड़ा तो होता बहुत बड़ी लहरें नहीं तो उसके अनुपात में छोटी होतीं !यदि ऐसा केवल समुद्र जल में ही हो सकता है तो समुद्र से निकालकर वो जल कहीं और भरा जाए तो उसमें तो नहीं होता है अधिक नहीं थोड़ा भरा जाए तो कुछ प्रतिक्रिया तो दिखाई देनी चाहिए ! तटीय वायु का स्पर्श पाकर यदि लहरें बनती हैं वायु एक जैसी तो कभी नहीं चलती और ये भी निश्चित नहीं है कि वायु हमेंशा चलती ही रहती हो ,वायु कभी कभी तो बिल्कुल शांत हो जाती है लेकिन लहरें तो हमेंशा ही बनती रहती हैं ! वायु का स्वभाव स्थिर नहीं होता है कभी अधिक चलने लगती है और कभी कम और बिल्कुल नहीं किंतु ज्वार भाटा का समय तो निश्चित होता ही है कभी कभी तो बिलकुल तो ऐसा तब संभव है श अब बात वायु की मैंने सुना 

छोटी छोटी टन चंद्र का कमाल होता तो पृथ्वी पर जहाँ जहाँ जल संग्रह होता वहाँ वहाँ समुद्र जल का ही अष्टमी पूर्णिमा अमावस्या जैसी तिथियों के आस पास मैंने सुना है कि ये लहरें और तीव्र हो जाती हैं जिससे इन लहरों का संबंध चन्द्रमा से जोड़ा गया किंतु यदि इसका कारण वास्तव में चंद्र ही है या जल में ही कोई ऐसा चमत्कार है तो क्या  उसी समुद्र जल को वहीँ पर किसी बड़े पात्र में भर कर रख दिया जाए तो क्या उसमें भी लहरें उठने लगेंगी !क्योंकि स्थान वही है जल वही है और चन्द्रमा वही है फिर तो लहरें उस पात्र के जल में भी उठनी चाहिए !इन लहरों का कारण न समुद्रजल है न चंद्र है और न ही वो स्थान ही है ! 
       वस्तुतः जल की प्रकृति अर्थात स्वभाव तो शांत होता है उस शांत समुद्र जल में लहरें उठा संभव ही नहीं है किंतु समुद्रस्थ वायु का संयोग मिलते ही समुद्र जल लहरों का रूप ले लेता है अर्थात ऊँची ऊँची लहरें उठने लगती हैं वायु के अलग होते ही वो ऊँची ऊँची लहरें पुनः शांत हो जाती हैं ज्वार भाँटा जैसे प्राकृतिक घटनाएँ भी वायु संचरण से ही निर्मित होती और शांत होती रहती हैं | लहरें हमेंशा वायु से ही बनती हैं इसमें जल की भूमिका कितनी होती है दूसरी बात लहरों के जल का परीक्षण करके या लहरों के अधोभाग में कोई यंत्र स्थापित करके लहरों के विषय में पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है !वायु जनित लहरों के बनने की प्रक्रिया देखते समय वहाँ भी वायु तो कहीं नहीं दिखाई पड़ता है फिर भी समुद्र जल में दिखाई पड़ने वाली लहरें वायु जनित ही होती हैं यह निश्चित है | 
          इसी प्रकार से चक्रवात आदि तो सीधे सीधे वायु जनित क्या साक्षात वायु स्वरूप ही हैं किन्तु इसी शांत वायु मंडल में बनते हैं और इसी में भयंकर रूप लेते हैं और फिर इसी में मिलकर शांत हो जाते हैं किंतु इनके बनने की प्रक्रिया तो किसी को नहीं दिखाई पड़ती है | कई बार गर्मी की ऋतु में देखा जाता है कि हवा बिल्कुल नहीं चल रही होती है इसी बीच सबके देखते देखते अचानक चक्रवात बन जाता है और सीमित दायरे में घूमने लगती हैं हवाएँ उसके साथ तृण धूल पत्तियाँ आदि भी अचानक उड़ती हुई वायु के साथ ही गोल गोल घूमने लग जाती हैं इसी बीच अचानक वहीँ पर सबके देखते देखते चक्रवात समाप्त हो जाता है और तृण धूल पत्तियाँ आदि भी जहाँ की तहाँ गिर जाती हैं ऐसी परिस्थिति में उन तृण आदि का परीक्षण करके चक्रवात का पूर्वानुमान तो नहीं लगाया जा सकता है !
     यदि समुद्र में उठने  वाली ऊँची ऊँची पानी की लहरें उठने का कारण समुद्र जल नहीं अपितु वायु हो सकती है !इसी प्रकार से चक्रवात प्रकरण में तृण धूल पत्तियों आदि के अचानक उड़ते हुए घूमने का कारण वो तृण आदि न होकर अपितु वायु हो सकती है !तो पृथ्वी के काँपने  अर्थात भूकंप आने का कारण इसी वायु मंडल में विद्यमान वही वायु क्यों नहीं हो सकती है !
   समुद्र में उठने वाली लहरों में जल की लहरें ही दिखाई पड़ती हैं वायु कहीं नहीं दीखती है इसी प्रकार से चक्रवात में वायु के आश्रय से उड़ने वाली  तृण धूल पत्तियाँ आदि ही दिखाई पड़ती हैं वायु कहीं नहीं दिखाई पड़ती है इसी प्रकार से वायु के संयोग से काँपने वाली पृथ्वी के प्रकरण में भूकंप के समय केवल काँपती हुई पृथ्वी ही दिखाई पड़ती है वायु कहीं नहीं दिखाई पड़ती है जबकि ये निश्चित है कि वो कंपन वायु से हो रहा होता है |  
    ऐसे में समुद्र की लहरें हों या चक्रवात में उड़ती हुई धूल पत्तियाँ आदि हों या भूकंप के समय काँपती हुई पृथ्वी हो इन तीनों का ही कारण वायु होती है जो दिखाई नहीं पड़ती है इसलिए इनके विषय में पूर्वानुमान करते समय केवल वायु से संबंधित अध्ययन ही पूर्वानुमान लगाने में सहायक हो सकता है इसके अलावा समुद्र जल और चक्रवात में उड़ती हुई धूल पत्तियाँ आदि  या फिर भूकंप के समय काँपती हुई पृथ्वी को अध्ययन का आधार बनाकर न समुद्र की लहरों का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है और न ही चक्रवात में उड़ती हुई धूल पत्तियों आदि के अचानक गोल गोल घूमते हुए उड़ने आदि का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है एवं इतनी विशाल पृथ्वी के काँपने का कारण भी पृथ्वी का अध्ययन करके नहीं अपितु वायु का अध्ययन करके ही लगाया जा सकता है | 
      पृथ्वी में छेद करके या गहरा गड्ढा खोद कर  पृथ्वी की आतंरिक गैसों का अध्ययन करके पृथ्वी के कंपन का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है जैसे सर्दी की ऋतु में ठंडी हवाएँ लगने से काँपने वाले व्यक्ति के काँपने का कारण खोजने के लिए उस व्यक्ति के पेट में छेद करके उसके पेट में भरी गैसों का अध्ययन करके उसके काँपने के लिए उस पेट और उसके पेट में भरी हुई गैसों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है और न ही ये कहा जा सकता है कि इसके पेट में भरे वायु के कारण इसकी हड्डियों पर दबाव पड़ने के कारण अस्थि भ्रंसन से कंपन होने लगता है या कौन कौन सी हड्डी शारीर के किस किस भाग में कितनी लंबी गई हुई है और शरीर के लिए कितनी महत्वपूर्ण है और शरीर के किस किस भाग में ऐसी महत्त्व पूर्ण अस्थियाँ हैं जिनमें भ्रंसन होने से कंपन होने की संभावना बनी रहती है इसलिए उन्हें डेंजरजोन घोषित कर दिया जाए !साथ ही शरीर में  वायु संचित होने वाले  कुछ स्थानों को पकड़ कर ये कहने लगना कि यहाँ गैसें बहुत संचित हैं इसलिए उन गैसों के कारण कभी भी यहाँ भीषण कंपन होने लग सकता है आदि !
     इसी प्रकार से प्रकृति के ज्वालामुखी और शरीर के पित्ताशय की गर्मी को शरीर के कंपन होने का कारण नहीं माना जा सकता है ! 
     कृत्रिम जलाशयों के कारण कंपन होने की बात को नकारा तो नहीं जा  सकता है किंतु सच्चाई इसमें भी नहीं है कि जलाशयों के वजन के कारण भूमिगत प्लेटें हिलने लगती हैं !वस्तुतः ये उसी तरह की बात है जैसे किसी काँपते हुए व्यक्ति के शिर पर रखे पानी के घड़े को देखकर ये कह दिया जाए कि इस घड़े के वजन से ही वह व्यक्ति काँप रहा है जबकि वास्तविकता ये हो कि ऋतु सर्दी की हो, प्रातः काल हो ,ठंडी हवा चल रही हो और घड़े से कुछ पानी छलक कर शरीर पर पड़ता जाता हो इन सभी कारणों के एक साथ एकत्रित हो जाने से जो ठंड लगती है उस ठण्ड लगने के कारण शरीर में होने  लगता  है कंपन !कुलमिलाकर इस कंपन का मूल कारण सिर   पर घड़े का रखा हुआ होना नहीं है अपितु ठंड लगना है ठंड के लगने के कारणों को खोजने पर पता लगता है कि शीत बढ़ाने वाले कई कारणों का एक समय पर एक स्थान पर इकट्ठा होना है | 
       ऐसे कम्पनों का अध्ययन करते समय केवल ये सोच लेना कि जब से इसने पानी भरा हुआ घड़ा सिर पर रखा है तभी से ये काँपने लगा है इसका मतलब सिर पर पानी भरा घड़ा रखने से कंपन होने ही लगता है !ये सिद्धांत बना दिया गया किंतु इसके कुछ समय बाद किसी दूसरे व्यक्ति को सिर पर पानी भरा घड़ा लाते हुए देखा गया तो पूर्वानुमान लगा लिया गया कि ये जरूर काँपता होगा क्योंकि ऐसी ही स्थिति में पहले जो देखा गया था वो काँप रहा था किंतु जब उसे देखा गया तो वो नहीं काँप रहा था तो रिसर्चर ये सोच कर मायूस हो गए कि ये दाँव भी खाली चला गया !फिर बीच का रास्ता निकालते हुए कह दिया गया कि चूँकि सिर पर पानी का घड़ा रखकर जाने वाले उस व्यक्ति के शरीर में कम्पन हो रहा था इसलिए इसके शरीर में भी कम्पन होना चाहिए !यदि अभी नहीं होता है तो बाद में होगा लेकिन जब होगा तब बहुत भयंकर होगा !रिसर्चर का वास्तविकता तक पहुँचने के लिए यह तर्क और तुलना ठीक नहीं है | किसी भी पूर्वाग्रह से बँध कर किसी शोध को उसके लक्ष्य तक नहीं पहुँचाया जा सकता है | 
      सिर पर पानी का घड़ा रखकर जा रहे दोनों व्यक्तियों की प्रत्यक्ष एक जैसी स्थिति देखकर उन अप्रत्यक्ष कारणों पर भी विचार करना था कि दूसरे के साथ संभवतः पहले वाले के जैसे उतने कारण न रहे हों !हो सकता है उसके घड़े से छलक कर पानी शरीर पर न गिरता हो ,हो सकता है सर्दी की ऋतु न रही हो,प्रातः काल न होकर दोपहर रही हो,ठंडी हवा न चलकर सामान्य अथवा  गर्म हवा चल रही हो ऐसी परिस्थिति में दोनों घड़ा धारकों में प्रत्यक्ष दिखने वाली बहुत सारी समानताओं के बाद भी संबंधित परिस्थितियों में आकाश पाताल जैसा बिल्कुल विपरीत अंतर भी हो सकता है यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए !इसी दृष्टि से कोयना जैसे जलाशयों के निर्माण के बाद उस क्षेत्र में आने वाले भूकम्पों की तुलना उन जलाशयों से नहीं कर देनी चाहिए जिन जलाशयों के निर्माण के बाद भी जहाँ भूकंप नहीं आते हैं !वहाँ जलाशय भले एक जैसे हों किंतु जलवायु जनित अन्य परिस्थितियों में पर्याप्त अंतर होगा जिसके सर्वांग शोध की आवश्यकता  समझी जानी चाहिए  
    शीतऋतु के समय ठंडी हवा के लगने से घड़े का पानी शरीर पर छलकने आदि कुछ कारणों के एक साथ एकत्रित हो जाने से शरीर में  कंपन होने लगता है !किंतु इस प्रकरण में विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता इस बात की है कि उन सभी एकत्रित कारणों पर अलग अलग शोध कार्य किया जाए |इस प्रकरण में घड़े से शरीर पर गिरने वाले जल का तो दोनों व्यक्तियों और घड़ों को देखकर संभव है कि अंदाजा लगाने का प्रयास ठीक से  कर भी लिया जाए किंतु बाकी सभी कारणों के विषय में अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है जबकि वे कम महत्वपूर्ण नहीं होते हैं ! इस प्रकरण में प्रातः काल है ,ठंडी हवा है, शीत ऋतु है इनका भी उतना ही महत्त्व है जितना कि सिर पर रखे हुए घड़े से शरीर पर जल गिरने का है किंतु हवा ऋतु और समय को तो हम प्रकृति समझ लेते हैं उसे सबके लिए एक जैसी मान लेते हैं इसलिए उस व्यक्ति के काँपने में इनकी कोई भूमिका होगी भी इधर हमारा ध्यान ही नहीं जाता है और जिस घड़े के हम पीछे पड़े होते हैं कि सिर पर घड़ा रखने के कारण उसके वजन से उस व्यक्ति के शरीर में कम्पन हो रहा है क्योंकि जब से घड़ा रखा तभी से कम्पन हुआ इसलिए स्वाभाविक लगेगा इस कम्पन का कारण घड़ा ही होगा किंतु वास्तविकता ये है कि इस कम्पन से घड़े भार का कोई संबंध ही नहीं है जबकि हमारा रिसर्च घड़े के बोझ से हड्डियों पर पड़ने वाले दबाव को लेकर ही चल रहा होता है | 
     इस कंपन प्रकरण में अध्ययन करने के लिए आवश्यक बहुमूल्य 4 विंदु मिले पहला शीतऋतु  दूसरा प्रातः काल तीसरा शीतल हवाएँ और चौथा घड़े से शरीर पर गिरने वाला जल | इसके लिए इन चारों का अलग अलग अध्ययन करना होगा शीतऋतु के लिए ये समय चक्र का अध्ययन करना होगा ,प्रातः काल के लिए सूर्य के उदय से अस्त के बीच भ्रमण की स्थिति का एवं ठंडी हवाओं के लिए वायु का एवं जल गिरने के लिए घड़े का अध्ययन करना होगा !ये चारों एक दूसरे से अलग अलग विषय हैं इसलिए इन चारों के अलग अलग विशेषज्ञ होना स्वाभाविक है वे अलग अलग इन विषयों का अध्ययन करें इसके बाद उनका एक जगह सामूहिक पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन हो तभी निष्कर्ष तक पहुँचा जा सकता है क्योंकि संभावना ऐसी भी है कि इनके अलग अलग असर डालने पर संभव है कि कम्पन न भी हो !इसलिए सामूहिक  प्रभाव पर ही अध्ययन करना होगा !
      हमसे गलती उस जगह हो रही होती है जब हम कांपने वाले व्यक्ति के पेट में छेद करके उसके पेट में बनने वाली गैसों को ही कंपन के लिए जिम्मेदार ठहरा देते हैं जबकि वास्तविकता तो ये है कि उस काँपने वाले व्यक्ति के कम्पन में उसके पेट की और पेट की गैसों की कोई भूमिका ही नहीं होती है उसके शरीर  की भूमिका भी केवल इतनी होती है कि कम्पन उसके शरीर में होता हुआ दिखाई दे रहा होता है इसके अलावा उस कम्पन में उसके शरीर की भी कोई अधिक भूमिका नहीं होती है फिर भी उसके काँपने का दोष यदि हम उसके शरीर और शरीर के अंदर की गैसों पर ही मढ़ते रहेंगे तो लक्ष्य तक पहुँच पाना  कैसे संभव हो सकता है |रही बात गैसों की तो पेट में हो या पृथ्वी में गैसें तो हमेंशा भरी ही रहती हैं किन्तु कम्पन हमेंशा तो नहीं होता रहता है | 
   विशेष बात ये है कि जिन गैसों और प्लेटों को भूकंप के लिए हम हमेंशा से जिम्मेदार ठहराते हुए चले आ रहे हैं उनके विषय में हमें ये भी सोचना होगा कि पेट के अंदर की गैसें हों या पृथ्वी के अंदर की ये तो शरीर और पृथ्वी की संरचना का अभिन्न हिस्सा होती हैं उनका निर्माण वहाँ आवश्यकता के अनुशार ही होता है वो कभी अतिरिक्त और बोझिल कर देने वाली होती ही नहीं हैं वो तो  साक्षात शरीर और पृथ्वी का स्वरूप ही हैं दोनों का निर्माण पंचतत्वों से हुआ है वायु उसी पाँच में से एक है ! जो शरीर में पेट के आंतरिक प्रदूषण से निर्मित होती है और कब्ज समाप्त होते ही समाप्त हो जाती है यही स्थिति पृथ्वी की भी होती है इसलिए उसके कारण कम्पन होना संभव ही नहीं है | 
      भूकंप आने से कुछ सप्ताह पहले से पशुओं पक्षियों या प्रकृति में दिखने वाले बदलावों पर सूक्ष्म दृष्टि रखनी होगी लक्षणों का मिलान करना होगा !क्योंकि प्रकृति में प्रतिपल परिवर्तन हो रहे हैं ऐसे परिवर्तनों का प्रभाव चराचर जगत में झलकने लगता है वस्तुतः सारा प्राकृतिक वातावरण ही एक दूसरे पर आश्रित होता है यदि ऐसा तो वैसा के सिद्धांतों से सब कुछ एक दूसरे से बँधा हुआ है !इनके अन्योन्याश्रय की निबद्धता के कारण ही तो इनकी आपसी इतनी एक रूपता होती है कि ये समझना पड़ता है कि सूर्य उगते हैं तो कमल खिलते हैं या कम खिलते हैं तो सूर्य उगता है ऐसे और भी कई प्राकृतिक उदाहरण हैं | प्रकृति के समीप जंगलों में रहने वाले ऋषि मुनि आदि इनका अत्यंत सूक्ष्म अध्ययन किया करते थे ! 
        ऋतुओं से निबद्ध प्रकृति ऋतु के अनुशार ही चलती है किंतु कई बार किसी ऋतु विशेष में वात पित्त और कफ आदि का प्रभाव अचानक बढ़ने  या घटने लगता है जिससे कि वातावरण में दो ऋतुओं के मिलावटी लक्षण प्रकट होने लगते हैं !ऐसे अवसरों पर ही ऋतुओं की सीमाओं का अतिक्रमण करके वृक्ष बनौषधियाँ आदि दूसरी ऋतुओं में भी फूलते फलते देखे जाते हैं !वो उस समय के प्राकृतिक बदलावों को प्रकट कर रहे होते हैं !कुल मिलाकर लता पत्रों वृक्षों बनौषधियों पर ऐसे बड़े बदलावों के  चिन्ह झलकने लगते हैं | 
     इसी प्रकार से प्राकृतिक जीवन जीने वाले जीवजंतुओं में प्रकृति के लक्षणों की बहुत बारीक पहचान होती है क्योंकि वे प्रकृति के अनुशार ही जीवन जीते देखे जाते हैं इसलिए प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों को जीव जंतु भी बहुत आसानी से महसूस कर लेते हैं और वैसा ही अचार व्यवहार बदलने लगते हैं !एक बार दिन के दो बजे दिन में खग्रास सूर्य ग्रहण पड़ने पर उस समय सूर्यास्त होने जैसे वातावरण का अनुभव करके दिन के दो बजे भी पक्षी वापस घोसलों में लौटते देखे गए थे | इसके अलावा कुछ पक्षी किसी ऋतु विशेष में किसी क्षेत्र विशेष में प्रतिवर्ष एकत्रित होते हैं और एक निश्चित समय तक रहकर वहाँ से चले जाते हैं उनके पास कोई पंचांग या कलेण्डर तो नहीं होता है और न ही उन्हें कोई बताने ही जाता है कोयलें समय से कूकने लगती हैं मुर्गा प्रातः काल  समय पर बोलते देखा जाता है इनके पास घड़ी  तो नहीं होती है | ऐसे सभी जीव जंतुओं में प्रकृति को पहचानने की अद्भुत क्षमता होती है |
        वातपित्त और कफ महत्त्व -
प्रकृति में भी वातपित्त और कफ की मात्रा घटती बढ़ती रहती है इन तीनों में विषमता बढ़ते ही घटित होने लगती हैं प्रकृति में भी कई प्रकार की दुर्घटनाएँ ! प्रकृति का जब वात बिगड़ता है तब वायु संबंधी दुर्घटनाएँ देखने को मिलती हैं आँधी चक्रवात या फिर प्रदूषित वायु का मिलना या वायु की अल्पता के कारण घुटन !इसी प्रकार से पित्त की मात्रा बिगड़ने पर पित्त संबंधी स्वास्थ्य विकार और समाज में आग सम्बन्धी दुर्घटनाएँ एवं प्रकृति में सूर्य सम्बन्धी दुर्घटनाएँ या प्राकृतिक घटनाएँ देखने सुनने को मिलने लगती हैं | ऐसे ही जब कफ की मात्रा घटती या बढ़ती है तब जल,शीत एवं कफ सम्बन्धी स्वास्थ्य विकार होते देखे जाते हैं समाज या किसी क्षेत्र अथवा ऋतु विशेष में ऐसा होने पर सामूहिक रूप से ऐसी बीमारियाँ फैलने लगती हैं इसी प्रकार से प्रकृति में ऐसा होने पर प्रकृति में संतुलन बिगड़ता है अर्थात इसका प्रभाव घटने से सूखा आदि समस्याएँ होने लगती हैं और इसके बढ़ने से वर्षा बाढ़ जैसे प्राकृतिक घटनाएँ देखने सुनने को मिलती हैं !
     वात पित्त और कफ ये तीनों के बढ़ने घटने का संबंध परस्पर एक दूसरे के बढ़ने घटने से भी होता है ! गर्मी बढ़ेगी तो ठंडी घटेगी ही इसी प्रकार से इसके विपरीत ठंडी घटेगी तो गर्मी बढ़ेगी ही !वायु तो गर्म और और ठंडी दोनों प्रकार की होती है और दोनों में ही विद्यमान रहती है |
     इसीलिए तो स्वास्थ्य सम्बन्धी प्रक्रिया हो या प्राकृतिक घटनाएँ ये केवल एक तत्व के बढ़ने घटने से नहीं घटित होती हैं इसमें दोनों के सहयोग की एक दूसरे को आवश्यकता पड़ती ही है अन्यथा एक की मात्रा जब बहुत बढ़ जाती है तो उससे संबंधित विकार बढ़ने लगते हैं | जैसे सूर्य का प्रभाव बहुत अधिक बढ़ जाने से गर्मी बढ़ जाती है और गर्मी बढ़ते ही  वायु  हल्की होने लग जाती है वो इतनी हल्की कि शरीर में उसके स्पर्श का आभाष ही नहीं होता है !इसीलिए तो गर्मी की ऋतु में लोग अक्सर यह कहते सुने जाते हैं कि इतनी तेज हवा चल रही है या पंखा चल रहा है किंतु शरीर में लगने का आभास ही नहीं होता है इसका कारण वायु का हल्का हो जाना होता है !यही वायु वर्षा या शीतऋतु में उससे काफी धीरे चलती हो तो भी उसके  स्पर्श का आभाष होता है पंखा चलाने पर वायु काटने की आवाज आती है और हवा का स्पर्श भी अधिक समझ में आता है |  
        सूर्य का प्रभाव अकेले अधिक बढ़ जाने से हवा तो तेज चलती है किंतु पानी नहीं बरसता है इसी प्रकार से चंद्र का प्रभाव अधिक बढ़ जाने से बादल तो  अधिक छा जाते हैं किंतु वर्षा नहीं होती है वर्षा के लिए तो दोनों का समान अनुपात में बढ़ना आवश्यक होता है जब इन दोनों की समानवृद्धि असाधारण हो जाती है तब होती है अतिवृष्टि और घटित होने लगती हैं भीषण बाढ़ जैसी समस्याएँ !
      शास्त्रों में सूर्य की पुरुष प्रवृत्ति मानी गई है और चंद्र की स्त्री प्रवृत्ति होती है| स्त्री और पुरुष के सम्मिलन से जैसे एक दूसरे के प्रति उत्तेजना  बढ़ती है उसी प्रकार से सूर्य और चंद्र के संयुक्त प्रभाव से मौसमी वायु चलने लगती है इसी कर्म में दोनों परिस्थितियाँ आगे बढ़ती चली जाती हैं और जैसे स्त्री पुरुष के मिलने से संतान का जन्म होता है उसी प्रकार से सूर्य और चंद्र के सम्मिलन  से वर्षा होती है !
       प्रकृति में भी होता है गर्भधारण प्रसव भी होता है - 
      सामान्य अर्थ तो सजीव अर्थात मनुष्यों पशुओं पक्षियों आदि समस्त जीव जंतुओं में ही गर्भ धारण की प्राकृतिक प्रक्रिया होती है किंतु इसके विशेष अभिप्रायार्थ में पहुँचने पर एक गूढ़ अर्थ भी प्रकट हो जाता है जो बहुत उपयोगी है विशेषकर स्वास्थ्य संबंधी घटनाएँ हों या प्राकृतिक घटनाएँ ये अच्छी हों या बुरी हर घटना घटने से कुछ घंटे दिन महीने एवं वर्ष आदि पहले उसका गर्भधारण काल होता है उसी गर्भधारण समय का गहन अध्ययन करके उसके प्रसव अर्थात उस घटना के घटित होने का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है ! किंतु ऐसा तभी संभव है जब किसी भी घटना से संबंधित  गर्भधारण काल का ज्ञान हो तब तो प्रसव काल का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है किन्तु यदि गर्भधारण काल ही न पता हो तो प्रसव के विषय में कल्पना कैसे की जा सकती है फिर तो जैसे जैसे लक्षण दिखाई पड़ते जाएँगे वैसा वैसा पता लगता जाएगा किंतु इसे पूर्वानुमान नहीं कहा जा सकता है !मौसम विज्ञान भी तो ऐसे ही भविष्यवाणियाँ करता है इसीलिए उनके पूर्वानुमान तीर तुक्का ही साबित होते हैं क्योंकि बिना गर्भकाल के ज्ञान के पूर्वानुमान संभव ही नहीं है !किसी महिला के गर्भिणी होने का ज्ञान हो तो उसके प्रसवकाल का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है किंतु बिना गर्भ काल जाने प्रसवकाल का पूर्वानुमान लगाना कठिन ही नहीं अपितु असंभव भी होता है | 

    गर्भधारण काल कहने से हमारा आशय है किसी भी घटना के घटने का ऐसा कारण बनना जिसके कारण  भविष्य में कोई दूसरी घटना का घटित होना संभव हो ! जैसे यदि किसी ने "विष खा लिया है तो उसकी मृत्यु होगी " इस घटना में संभावित मृत्यु का पूर्वानुमान विष खाने के साथ ही लगाया जा सकता है इसलिए ऐसी मृत्यु का गर्भधारण काल वही समय है जब उसने विषभक्षण किया था !
   इस प्रकार से प्रकृति से लेकर समस्त चराचर जगत से जुड़ी अधिकाँश घटनाओं का अपना अपना गर्भकाल होता है किसका कितने दिन गर्भकाल हर किसी का गुप्त होता है निरंतर शोध प्रक्रिया से गुजरने वाले विशेषज्ञों  को इसका अनुभव होता है इसी के आधार पर वो लोग उससे संबंधित घटनाओं के भविष्य में घटित होने का पूर्वानुमान लगा लिया करते हैं |जैसे हर गर्भ से संतान होना निश्चित नहीं होता है कुछ गर्भस्राव के शिकार हो जाते हैं और कुछ गर्भपात के और कुछ तो गर्भ होते ही नहीं हैं केवल गर्भ जैसे लगने के कारण उन्हें भी अनुभव के अभाव में गर्भ जैसा मान लिया जाता है किंतु उनका प्रसव प्रसव काल में न होकर जब कभी जहाँ कहीं भी हो जाता है ! यदि ऐसा न होता तो गर्भस्राव या गर्भपात आदि घटनाएँ क्यों घटित होतीं यहाँ तक कि आम के पेड़ों में बसंत ऋतु में लगने वाली मंजरी के सभी फूलों में तो फल नहीं लग जाते कुछ फूल झूठे निकल जाते  फल बीच में ही  खंडित हो जाते हैं | इसी प्रकार से प्रकृति एवं स्वास्थ्य से संबंधित प्रत्येक घटना के विषय में जानना चाहिए कि पूर्वानुमान अनुमान मात्र होते हैं इन्हें शतप्रतिशत सच नहीं माना जा सकता है किंतु ये तीर तुक्के नहीं होते हैं और न ही अधिकाँश जगह गलत हो सकते हैं अपितु  अनुभव के आधार पर इन्हें प्रयासपूर्वक सत्यता के काफी नजदीक तक ले जाया जा सकता है |  |    
     भूकंपों की गर्भप्रक्रिया - 
    जैसे स्त्री पुरुष के संसर्ग से हुए गर्भ का प्रसव 9-10 महीने में होता है उसी प्रकार से सूर्य और चंद्र के प्रभाव के समागम से होने वाले गर्भ का प्रसव 6-7 महीने के बीच उचित लक्षण प्राप्त होने पर होता है !इसी प्रकार से शारीरिक एवं प्राकृतिक हर घटना का पहले गर्भ होता है और बाद में प्रसव होता है हर प्रकार की घटना का प्रसवकाल उसके गर्भकाल के अनुशार ही होता है इसलिए प्रसवकाल अर्थात घटना घटित होने के समय का पूर्वानुमान लगाने के लिए उस घटना के गर्भकाल अर्थात प्रारंभिक काल की जानकारी होनी बहुत आवश्यक होती है क्योंकि पूर्वानुमान लगाने के लिए वही आधारभूत मेरुदंड होता है |अलग अलग घटनाओं के हिसाब से गर्भधारण और प्रसवकाल का अंतर भी अलग अलग होता है| यह घंटे दिन महीने एवं वर्ष आदि  कुछ भी हो सकते हैं जो शास्त्रीय स्वाध्याय एवं दीर्घकालीन अनुभव से जाने जा सकते हैं ! 
     प्रकृति की  अच्छी बुरी सभी घटनाओं की तरह ही भूकंपों का भी गर्भकाल होता है जिसकी अधिकतम अवधि 180 दिनों की होती है जैसे महिलाओं के गर्भकाल के प्रारंभिक कुछ महीने बाद तक गर्भ के लक्षण दिखाई नहीं पड़ते किंतु प्रसव के कुछ पूर्व से वो लक्षण प्रकट रूप में दिखाई पड़ने लगते हैं इसी प्रकार से प्रकृति में भी भूकंप निर्माण होते समय तो कुछ समझ नहीं आता है किंतु भूकंप आने के समय के कुछ  पहले से ही प्रकट होने लग जाती हैं जिनका अनुभव बहुत जीव जंतुओं को होने लगता है ऐसा वर्षा आदि घटनाओं में भी होते देखा जाता है !ऐसे गर्भों में वात पित्त और कफ की  बड़ी भूमिका होती है | 
वात पित्त और कफ -
       वात का अर्थ है वायु एवं पित्त तो साक्षात् सूर्य का ही स्वरूप है एवं कफ चंद्र का प्रतिनिधित्व करता है !कुल मिलाकर सूर्य चंद्र और वायु की न्यूनाधिकता से ही इस चराचर विश्व का संचालन होता हैसृष्टि के सभी सजीव व निर्जीव पदार्थ आदि  का सृजन पालन और संहार के कारक यही वातपित्त और कफ हैं इनके अनुचित रूप से घटने और बढ़ने से ही रोग होते हैं एवं उचित अनुपात में रहने से स्वास्थ्य रक्षा होती रहती है कुल मिलाकर सृजन से संहार तक सब कुछ इसी वात पित्त और कफ  से ही संभव होता है  | 
     अलग अलग ऋतुओं के हिसाब से इन्हीं वात पित्त और कफ  आदि  तीनों का भिन्न भिन्न  अनुपात में संतुलन बना हुआ है इन्हीं तीनों के उसी संतुलन के हिसाब से सृष्टि के सभी परिवर्तन गुँथे हुए हैं !इन्हीं अलग अलग अनुपातों के हिसाब से सारी सृष्टि का संचालन अनंत काल से होता चला आ रहा है इन्हीं तीनों के एक निश्चित अनुपात के आधार पर ये सुनिश्चित है कि किस पेड़ में कौन सा फल या फूल वात पित्त और कफ के किस अनुपात में होने पर फूलेगा या फलेगा !इसीलिए तो जो वृक्ष पूरे वर्ष खड़े रहते हैं किंतु वात पित्त और कफ अपने ले प्रकृति के द्वारा सुनिश्चित किया गया अनुपात पाते ही फूलने फलने लगते हैं ऐसा अनुकूल अवसर यदि अधिक दिन के लिए मिल गया तब तो आम आदि की  बहुत अच्छी हो जाती है और यदि कम दिनों के लिए मिला तो कमजोर रह जाती है !इसी प्रकार से कुछ बीज खेतों में पूरे वर्ष  पड़े रहते हैं किंतु वात पित्त और कफ  आदि  तीनों का प्रकृति द्वारा सुनिश्चित अनुपात जिस ऋतु में मिलने लगता है उस ऋतु में उग जाते हैं !
      किसी व्यक्ति को कोई रोग हो या फिर कोई प्राकृतिक आपदा घटित हो सब कुछ इन्हीं तीनों के अनुचित अनुपात के सम्मिश्रण से ही संभव हो पाता है इस सृष्टि में ये तीनों हर जगह पर हर समय विद्यमान रहते हैं इन्हीं तीनों के विषम अनुपात में होने से गठित होती हैं प्राकृतिक आपदाएँ इसीलिए रोगों तथा प्राकृतिक आपदाओं पर कोई भी शोधकार्य इन तीनों के अध्ययन के बिना अधूरा  ही रहेगा | 
       इन्हीं वात पित्त और कफ के अलग अलग अनुपात का सुनियोजित निर्धारण करती हैं ऋतुएँ !ऋतुओं का नाम लेते ही पता लग जाता है कि इस ऋतु में इन तीनों का अनुपात कैसा रहेगा !इसी प्रकार से दिन के तीन भाग होते हैं रात्रि के भी तीन भाग होते हैं उन तीनों भागों में तीनों का अनुपात भिन्न भिन्न अर्थात तीन प्रकार का होता है !ऋतुएँ समय के अनुशार बदलती हैं और ऋतुओं के अनुशार बदलते रहते हैं  वात पित्त और कफ के अनुपात ! 
वायु विशेष बलवान होता है -
      वायु तो सूर्य -चंद्र ,सर्दी-गर्मी तथा कफ और पित्त दोनों का सहयोगी है इसीलिए तो शीतऋतु की हवा शीतलहरी और गर्मी की हवा को  'लू' कहा जाता है इसलिए वायु को स्वतंत्र माना गया है !आयुर्वेद में वायु को नेता कहा गया है यथा -
                                                             धातु दोष मलादीनां नेता शीघ्रं समीरणः |  
       वायु शरीर और संसार दोनों को ही धारण करता है इसीप्रकार से आयुर्वेद में महर्षि चरक ने कहा है कि वायु ही इस भूमण्डल को धारण करता है यही वायु सूर्य चंद्र समेत समस्त ग्रहों नक्षत्रों आदि को निरंतर नियम पूर्वक गति में रखता है यही वायु बादलों को बनाता है वर्षा करता है नदी आदि के स्रोतों को संचालित करता है !चारों समुद्रों के जलों को धारण करता है ! इसी बात को महाभारत में भी कहा गया है | महाभारत में वायु के 7भेद बताए गए हैं उसमें 'उद्वह' नामक वायु समुद्र के जल को धारण करती है -
                       "यश्चतुर्भ्यः समुद्रेभ्यो वायुर्धारयते जलम् "-महाभारत 
     इसी वायु के द्वारा  पृथ्वी के अंदर से वृक्षों के अंकुर निकलना ,फल और फूलों को उत्पन्न करना,ऋतुओं का विभाग करना,बीजों में अंकुर उत्पन्न करने की शक्ति पैदा करना !अनाज को कम या अधिक उत्पन्न करना  उसे सड़ने न देना आदि वायु के ही सहज गुण हैं !
         कुपित वायु के गुण  - 
    यही वायु जब कुपित हो जाती है तब पर्वतों की चोटियों को तोड़ती है वृक्षों को उखाड़ती है समुद्रों को उत्पीड़ित करती है अर्थात ऊँची ऊँची तरंगें उत्पन्न करके उसे क्षुब्ध कर देती है तालाब नदियों आदि में जल को उछालकर तटों से बाहर बहने के लिए प्रेरित करना !नदियों के प्रवाह को परिवर्तित कर देना ,भूमि को कँपाना अर्थात भूकंप लाना ,बादलों का गंभीर गर्जन करवाने वाला है !इसी वायु के प्रकोप से पला पड़ता है आकाश से धूल बालू रेत मछली मेंढक सर्प राख रक्त छोटे छोटे पत्थर  आकाश से गिरते देखे जाते हैं | इसी वायु के प्रकोप से आकाश से बिजली गिरती है ऋतुओं का विभाजन एवं प्रभाव परिवर्तन होता है अर्थात ऋतुओं का अयोग अतियोग मिथ्यायोग आदि करता है परिमाण से अधिक अन्न उत्पन्न होना आदि !प्राणियों की मृत्यु तथा  पृथ्वी वायु जल अग्नि एवं आकाश आदि से सम्बंधित उपद्रव की कारक प्रकुपित वायु ही है महाप्रलय लाने के लिए वाले बादल सूर्य वायु एवं अग्नि आदि का सृजन करना प्रकुपित वायु का ही कार्य है !
        विशेष बात ये है कि चरक संहिता आयुर्वेद का ग्रन्थ है उसमें इन सब प्राकृतिक घटनाओं की चर्चा करने का औचित्य सामान्य रूप से तो दिखता नहीं है फिर यहाँ इसकी चर्चा  की आवश्यकता क्या थी ?इस पर महर्षि ने कहा कि शरीरस्थ वायु तो किसी एक का स्वास्थ्य बिगाड़ सकती है जबकि शरीर के अलावा प्रकृति में विद्यमान  बहिश्चर प्रकुपित वायु जनपदोध्वंस अर्थात सम्पूर्ण नगर शहर क्षेत्र आदि में रहने वाले अधिकाँश लोगों को एक जैसे रोग की लपेट में ले लेती है वही प्रकुपित वायु ऐसी प्राकृतिक घटनाओं का भी कारण  होता है अर्थात सामूहिक बीमारियाँ और प्राकृतिक घटनाएँ एक जैसे वातावरण में घटित होती हैं |अर्थात उस तरह की प्राकृतिक  घटनाएँ देखकर प्रकुपित वायुजन्य रोगों का पूर्वानुमान लगाकर उनसे सतर्क रहकर अग्रिम उपाय किए जा सकते हैं  |
      वायु ,सूर्य और चंद्र आदि का महत्त्व !
  इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी बन या बिगड़ रहा है उसका कारण सूर्यचंद्र और वायु ही हैं शरीर संबंधी किसी विकार के उत्पन्न होने पर इन्हीं तीन को वात पित्त और कफ के रूप में पहचाना जाता है !वात अर्थात 'वायु' और पित्त अर्थात 'सूर्य' एवं कफ अर्थात 'चंद्र' |आयुर्वेद में  भी यही कहा गया है यथा -
              विसर्गादान विक्षेपैः सोमसूर्यानिलास्तथा !   
           धारयन्ति जगद्देहं  कफपित्तानिलस्तथा || 
अर्थात चंद्र अपनी किरणों से अमृत वरसाता है सूर्य रसों का शोषण करता है और वायु इस संसार को धारण करता है आयुर्वेद की भाषा में चंद्र विसर्ग कारक ,सूर्य आदान कारक एवं वायु विक्षेप कारक होता है ! इससे अभिप्राय यह है कि चंद्र के कारण शीत (सर्दी),सूर्य के कारण उष्ण(गर्मी)होती है और वायु इन दोनों गुणों को प्रेरित करती है अर्थात इनके प्रभाव को घटाती बढ़ाती है वायु !
    अर्थात  प्रकृति में कोई अच्छी बुरी घटना घटे या स्वास्थ्य संबंधी घटना का निर्माण हो सब कुछ इन्हीं तीनों का अनुपात बनने या बिगड़ने से होता है आयुर्वेद तो टिका ही इन्हीं तीन पर है इन्हीं वात पित्त और कफ की कमी या अधिकता अर्थात उचित अनुपात में न होने से स्वास्थ्य बिगड़ जाता है और उसे संतुलन में ले आने से स्वास्थ्य ठीक हो जाता है रोगों को दूर करने वाली औषधियाँ इन्हीं तीनों के बिगड़े हुए अनुपात को उचित मात्रा में कर लेती हैं स्वास्थ्य अपने आप से ठीक हो जाता है |कुल मिलाकर यही वात पित्त और कफ  आदि जैसे शरीर को धारण करते हैं उसी प्रकार से यही तीनों सारे संसार को धारण करते हैं |शरीर और प्रकृति से संबंधित अच्छी बुरी सभी घटनाएँ वात पित्त और कफ के प्रवाह से ही घटित होती हैं | जबकि भूकंप जैसी घटनाएँ  प्रकुपित वायु की  अधिकता से घटित होती हैं |    
      भूकंपों के लक्षणों का परीक्षण किया जाना चाहिए !
         सभी भूकंपों के लक्षण अलग अलग होते हैं उनके परिणाम भी एक जैसे नहीं होते उनका असर भी एक जैसा नहीं होता है किसी में आफ्टर शॉक्स  आते हैं किसी में नहीं आते हैं किसी भूकंप के आने के समय आवाज होती है किसी में नहीं होती है किसी भूकंप के समय आग लग जाती है किसी में नहीं लगती !किसी भूकंप के समय लोगों को चक्कर आने लगते हैं साँसफूलने लगती है उल्टी होने या लगने लगती है पेट दर्द होता है घबड़ाहट होती है पागलपन छाने लगता है किसी में एक दूसरे के प्रति अच्छे भाव बनने लगते हैं !किसी भूकंप आने के कुछ महीने पहले से कुछ विशेष फसलें नष्ट होने लगती हैं पौधों में कोई विशेष प्रकार का कीड़ा लगने या रोग फैलने लगता है |बड़े वृक्षों के पत्तों फूलों फलों में कोई एक जैसा रोग होने लगे या रंग से लेकर आकार प्रकार आदि में कुछ अजीब सा परिवर्तन लगने लगे तो ये निकट भविष्य के कुछ दिनों सप्ताहों महीनों आदि में आने वाली भूकंप जैसी किसी प्राकृतिक आपदा का संकेत दे रहे होते हैं !कई बार किसी क्षेत्र विशेष में कोई विशेष प्रकार की बीमारी अचानक सामूहिक रूप से फैलने लगती है ये भी भूकंप जैसी आपदा के ही संकेत समझ कर उनका परीक्षण किया जाना चाहिए !
      कुछ भूकम्पों के आने के कुछ दिनों सप्ताहों महीनों पहले से वहाँ ऋतुओं का स्वभाव लाँघकर वहाँ गर्मी ,सर्दी वर्षा आदि लगातार होने लगती है तेज हवा लगातार चलने लगती है या कोई बड़ा आँधी तूफान बाढ़ आदि का प्रकोप बढ़ने लगता है |बार बार आग लगने लगती है नदी कुआँ तालाब आदि तेजी से सूखने लगते हैं किसी पहाड़ गाँव आदि को दूर से देखने से उसका रंग बदला हुआ दिखाई देने लगे तो  ऐसे लक्षणों को भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के संकेत समझकर इनका परीक्षण किया जाना चाहिए !
     कई बार किसी क्षेत्र में लोगों को एक दूसरे पर अचानक अकारण क्रोध आने लगे लोग एक दूसरे को मरने मारने पर उतारू होने लगें घरों में समाज में कलह का वातावरण अचानक और अकारण बनने लगे सीधे साधे शिक्षित ,समझदार और शांति पसंद लोग भी अचानक ही उन्माद और क्रोध की भाषा बोलने लगें ,अकारण ही चारों ओर उत्तेजना का वातावरण बनता दिखाई देने लगे तो निकट भविष्य में किसी भूकंप के आने का संकेत होता है ऐसा समझ कर उसके लक्षणों का परीक्षण किया जाना चाहिए | 
     कई बार कुछ वर्ग विशेष के पशु पक्षी आदि जीव जंतुओं के आचार व्यवहार स्वभाव आदि में अचानक कुछ इस प्रकार के परिवर्तन अचानक दिखने लगें जो उनके स्वभाव में पहले न देखे जाते रहे हों इन्हें भूकंप जैसी किसी आगामी आपदा का संकेत समझकर उसी प्रकार से ही परीक्षण किए जाने चाहिए !
कई बार किसी एक ही क्षेत्र में बार बार बिजली गिरने लगती है आकाश से धूल की वर्षा होने लगती है या आकाश में धुआँ धुआँ सा छाया हुआ दिखने लगता है ,आकाश का रंग कुछ अलग सा या बदला बदला हुआ सा दिखने लगता है सूर्य और चंद्र मंडलों में कुछ विशेष प्रकार के चिन्ह दिखाई पड़ने लगते हैं आकाश में कोई विशेष प्रकार की आकृति दिखाई देने लगती है तो ये भी निकट भविष्य में आने वाले भूकंप के संकेत हो सकते हैं | 
     कई बार किन्हीं दो देशों के पहले से चले आ रहे आपसी संबंधों में उनके स्वभावों के विरूद्ध जाकर एक दूसरे के प्रति अचानक और अकारण कोई मित्र या शत्रु भावना पनपती दिखने लगे तो इसे उन दोनों देशों में आने वाले भूकंप संकेतों को समझकर परीक्षण किया जाना चाहिए !
    यदि किसी क्षेत्र के आकाश में अतिविशाल पर्वतों के समान भौंरों के सामान काले  काले विकराल बादल दिखने लगें और थोड़ी बहुत वर्षा भी होती दिख रही हो !चिकित्सकों के पास पतले दस्त वाले रोगियों , कंठरोगियों मुखरोगियों कफरोगियों जैसी एक प्रकार की बढ़ती सामूहिक बीमारियों के लक्षण प्रकट होने लगें तो निकट भविष्य में आने वाले भूकम्पों की सूचना दे रहे होते हैं उसी दृष्टि से उनका परीक्षण किया जाना चाहिए !
      इसी प्रकार से सभी प्रकार के भूकंपों की गर्भधारण प्रक्रिया भूकंप प्रसव होने अर्थात भूकंपों के आने के  6 महीने पहले से प्रारंभ होती है आरंभिककाल में तो इनके लक्षण उतने स्पष्ट नहीं दिखाई पड़ते हैं किंतु जैसे जैसे समय समीप आने लगता है वैसे वैसे लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं फिर भी सूक्ष्म एवं बारीकी से अनुभव किए जाने योग्य ही होते हैं |उस क्षेत्र के मनुष्यों से लेकर पशुओं पक्षियों समेत सभी जीवों की बेचैनी बढ़ने लगती है वृक्षों लताओं बनौषधियों एवं फसलों से संबंधित पौधों आदि के आकारों प्रकारों एवं स्वभाव आदि में उन लक्षणों को अनुभव के द्वारा पहचाना जा सकता है |इसके लिए लम्बे समय तक अभ्यास और अनुभव किए जाने की आवश्यकता होती है |      
भूकंप मुख्यरूप से तीन प्रकार के होते हैं -'वातज', 'पित्तज' और 'कफज'   
     'वातज' अर्थात वायुमंडल में बनने वाले भूकंप ! 'पित्तज'अर्थात सूर्य किरणों से निर्मित होने वाले भूकंप ! 'कफज' अर्थात चंद्र की किरणों के द्वारा निर्मित होने वाले भूकंप '  के द्वारा होने वाला भूकंप ! 'वातज' अर्थात वायु के द्वारा बनने वाले भूकंप, 'पित्तज' या 'अग्निज'अर्थात 'सूर्य' से होने वाले भूकंप ! तीसरा 'जलज'  या 'कफज' अर्थात चंद्र'  के द्वारा होने वाले भूकंप !
      इसके अलावा भी एक भूकंप होता है जिसमें सभी भूकम्पों के लक्षण मिले हुए होते हैं ऐसे परिस्थिति  में ये समझ पाना बहुत कठिन होता है | ये भूकंप किस दोष से आया है  अतः ऐसे भूकम्पों को 'सन्निपातज' या सभी लक्षणों  से मिला जुला भूकंप मानना चाहिए !
     वात पित्तादि भेदों से भूकंपों के तीन प्रकार हो जाने के कारण ये जो त्रिकोण तैयार होता है वो तीनों कोने  स्वभावों लक्षणों चिन्हों फलों एवं संकेतों की दृष्टि से एक दूसरे से बिल्कुल अलग अलग या फिर बिल्कुल विपरीत हैं ऐसी परिस्थिति में उनके पारस्परिक लक्षणों चिन्हों आदि का एक दूसरे के साथ मिलान कर पाना कैसे संभव है !सूर्य के प्रभाव से आने वाले भूकंप मछलियों मेढकों आदि जल में रहने वाले या गर्मी में अधिक बेचैनी का अनुभव करने वाले भैंस  हाथी आदि जीव पशुओं के स्वभावों में बेचैनी पैदा करने लगता है जबकि चंद्रज भूकंपों में ये सब बड़ा आनंदित बने रहते हैं  ऐसी परिस्थिति में भूकंपों के विषय में शोधकार्य करने वाले जो विद्वान शोधार्थी एक जैसे लक्षणों को मिलाने के पक्ष में रहते हैं वो निराश हो जाते हैं उन्हें लगता है कि जब पिछले भूकंप से पहले मेढक बेचैन होकर तालाब छोड़कर चले गए थे किंतु अबकी बार वाले भूकंप में तो ऐसा कुछ दिखाई नहीं दिया इसका मतलब ये लक्षण गलत हैं , इसी प्रकार कोयना में जलाशय बना तो वहाँ पानी भरने के बाद भूकंप आने लगे किंतु टिहरी वाले जलाशय में तो ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला !मतलब साफ है कि भूकम्पों के भेद को न समझ पाने के कारण ऐसी जगहों पर आधार विहीन झूठ बोला जाने लगा अर्थात कहा जाने लगा कि टिहरी जैसे जिन जलाशयों में अभी भूकंप नहीं आया है वहाँ किसी दिन बहुत भारी भूकंप आएगा !ऐसा कहने के पीछे का आधार यह है कि कोयना जलाशय बनने के बाद जब वहाँ भूकंप आने लगे तब उसका सूक्ष्म परीक्षण किए बिना बोल दिया गया कि जलाशयों के कारण भूकंप आते ही हैं इसके बाद टिहरी के जलाशय में भूकंप न आने का कारण बताने के लिए एक आधार विहीन झूठ गढ़ना पड़ा !
    इसी प्रकार से हिमालय के नीचे बहुत गैसों के संचित होने वाली बात है भारत ही नहीं विश्व के कई देशों के भूकंप वैज्ञानिकों के रिसर्च निष्कर्ष पढ़ने सुनने को मिले कि" हिमालय के नीचे तो गैसों का बहुत बड़ा भंडार संचित हो चुका है इसलिए यहाँ किसी समय यहाँ बहुत बड़ा भूकंप आएगा !" ऐसी परिस्थिति में जैसे सारी पृथ्वी पर कभी भी कहीं भी भूकंप आ जाता है उसी क्रम में यदि एक बार हिमालय पर कोई बड़ा भूकंप आ जाए तो ये मान लिया जाएगा कि उन्हीं गैसों के कारण आया है !ऐसी परिस्थिति में यदि छोटा भूकंप भी आ जाए तो भी मान लिया जाएगा कि आया उन्हीं गैसों के कारण है किंतु बहुत थोड़ी गैसें पास हुई हैं भविष्य में आएगा बहुत बड़ा भूकंप !" आदि बातों के सहारे गैसों वाली उन बातों को ज़िंदा बनाए रखा जाएगा !इस विषय में हमारा कहना मात्र इतना है कि माना कि जो कहा जा रहा है वही सही हो किंतु आधार और तर्क तो मजबूत दिए जाने चाहिए थे और ऐसे किसी दावे की जब तक पुष्टि न हो तक ऐसी किसी बात को इतने विश्वास से कहना युक्ति युक्त नहीं है | 

 'वातज' भूकंपों के लक्षण -
       वात प्रकृति के भूकंपों  से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगता है  तेज हवाएँ  आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें धूमिल दिखने लगती हैं !अनाज, जल और औषधियों की कमी होने लगाती है फसलों का नुक्सान होने लगता है ! शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगती है ।समाज में ज्वर रोग तथा  पागलपन की परेशानियाँ बढ़ने लगती हैं| अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखने लगते हैं अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होते देखे जाने लगते हैं | डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापारियों को अकारण अचानक नुक्सान होने लगता है जिससे ये वर्ग बहुत बेचैन रहने लगता है  |ऐसे भूकंप संभावित  क्षेत्र के लोगों को दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ने लगती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ बढ़ने लग जाती हैं | ऐसे लक्षणों के मिलने पर ऐसी संभावना बनने लगती है कि यहाँ के वायु मंडल में 'वातज' भूकंप घटित होने की संभावना बनते दिख रही है इसी भावना से प्रकृति लक्षणों की परीक्षा भूकंप की दृष्टि से प्रारंभ कर देनी चाहिए !
'पित्तज'भूकंपों के लक्षण - 


भूकंपीय क्षेत्र में अग्नि सम्बन्धी समस्याएँ बहुत अधिक भी बढ़ सकती हैं इस समय भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है इसलिए कभी भी कहीं भी आग लगने की दुर्घटनाएँ घट सकती हैं कुएँ तालाब नदियाँ आदि बहुत जल्दी सूखने लगेंगी !वर्षा की संभावनाएँ अत्यंत कमजोर हो जाएंगी भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में अगले 50 दिनों तक वर्षा की संभावनाएँ बिलकुल न के बराबर होंगी !      गर्मी से संबंधित रोग विशेष रूप से पनपेंगे  इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं ।      इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि का जलस्तर तेजी से घटेगा !पित्त अर्थात गर्मी से संबंधित रोगों से सतर्क रहना चाहिए !      यहीं से शुरू होकर रोहतक में लोगों के आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे लोग एक दूसरे मरने पर उतारू हो जाएंगे निकट भविष्य में अशांति संभव है लोगों के आपसी सम्बन्धों में कटुता बढ़ती चली जाएगी !    इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बढ़ने की सम्भावना है !
 'कफज' भूकंपों के लक्षण-
प्राचीन विज्ञान के हिसाब से इन दोनों भूकंपों के केंद्र जल से संबंधित हैं अतः जम्मू-कश्मीर में नदियों तालाबों के किनारे और ऐसे जल के संपर्क में अधिक रहने वाले लोग जल जनित बड़ी बीमारियों के शिकार होंगे !इन क्षेत्रों में तालाब आदि के संपर्क में रहने वाले लोग या गंदे जल का सेवन करने वाले लोग हों या गंदे जल में नहाने वाले लोग इस समय कई बड़ी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं कुल मिलाकर पानी के प्रदूषण से प्रदूषित वायु का स्पर्श होने से भी हो सकती हैं उल्टी दस्त एवं ज्वर जैसी अधिक दिनों तक चलने वाली कई बड़ी बीमारियाँ सरकार इनसे बचाव के लिए समय रहते यदि सचेत नहीं हो सकी तो इस वर्ष ये बीमारियाँ सरकार के नियंत्रण से बाहर भी जा सकती हैं पानी के किनारे रहने वाली जनता इन्हींबीमारियों से  भीषण त्राहित्राहि कर उठेगी ।      इस भूकंप  से नदी के किनारे बसने वाले लोगों की बहुत बड़ी क्षति होगी । जल जनित बीमारियों जैसी बड़ी बाधाएँ निकट भविष्य में बहुत अधिक होना संभव हैं ।इस भूकंप  से नदी के किनारे बसने वाले लोगों की बहुत बड़ी क्षति होगी । जल जनित बीमारियों से बचने के लिए नदी तालाब आदि के जलों के संपर्क में रहने से अधिक से अधिक बचने का प्रयास करें !


       
जम्मू-कश्मीर -

जम्मू-कश्मीर में भूकंप :28-2- 2017 को रात 8 बजे तीव्रता 5.5 का 'कफज 'भूकंप ! 
        जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में मंगलवार को रात करीब 8 बजे भूकंप के तेज झटके लगे हैं. भूकंप के झटकों की तीव्रता रियेक्टर पैमाने पर 5.5 बताई जा रही है. इस भूकंप का केंद्र तजाकिस्तान में पाया गया है.
      जम्मू-कश्मीर में आए भूकंप की शास्त्र वर्णित विशेषताएँ!  
   ऐसे 'कफज' या 'चन्द्रज' भूकंप 
     प्राचीन विज्ञान के हिसाब से इन दोनों भूकंपों के केंद्र जल से संबंधित हैं अतः जम्मू-कश्मीर में नदियों तालाबों के किनारे और ऐसे जल के संपर्क में अधिक रहने वाले लोग जल जनित बड़ी बीमारियों के शिकार होंगे !इन क्षेत्रों में तालाब आदि के संपर्क में रहने वाले लोग या गंदे जल का सेवन करने वाले लोग हों या गंदे जल में नहाने वाले लोग इस समय कई बड़ी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं कुल मिलाकर पानी के प्रदूषण से प्रदूषित वायु का स्पर्श होने से भी हो सकती हैं उल्टी दस्त एवं ज्वर जैसी अधिक दिनों तक चलने वाली कई बड़ी बीमारियाँ सरकार इनसे बचाव के लिए समय रहते यदि सचेत नहीं हो सकी तो इस वर्ष ये बीमारियाँ सरकार के नियंत्रण से बाहर भी जा सकती हैं पानी के किनारे रहने वाली जनता इन्हींबीमारियों से  भीषण त्राहित्राहि कर उठेगी ।      इस भूकंप  से नदी के किनारे बसने वाले लोगों की बहुत बड़ी क्षति होगी । जल जनित बीमारियों जैसी बड़ी बाधाएँ निकट भविष्य में बहुत अधिक होना संभव हैं । इस भूकंप का फल 15-2-2017तक विशेष रहेगा !       प्राचीन विज्ञान के हिसाब से ऐसे भूकंप का केंद्र जल से संबंधित होता है !जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र में जलजनित गैसों के प्रकोप से ये भूकम्प आया  है और उन्हीं गैसों के प्रकोप से ज्वर आदि बीमारियाँ अचानक बढ़ती चली जाएँगी !इस भूकंप का असर 15-2-2017तक विशेष रहेगा उसके बाद धीरे धीरे सामान्य होता चला जाएगा और बीमारियाँ भी समय के साथ साथ धीरे धीरे घटती चली जाएँगी !
     इस भूकंप  से नदी के किनारे बसने वाले लोगों की बहुत बड़ी क्षति होगी । जल जनित बीमारियों से बचने के लिए नदी तालाब आदि के जलों के संपर्क में रहने से अधिक से अधिक बचने का प्रयास करें !

भूकंप (कफज )18-4-2017जम्मू-कश्मीर में

जम्मू-कश्मीर में हिली धरती, किश्तवाड़ में 5 की तीव्रता का भूकंपइस्लामाबाद सहित कई शहरों में भूकंप के झटके       पाकिस्तान के कई शहरों में मंगलवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इनकी तीव्रता 5.0 मापी गई। भूकंप के झटके इस्लामाबाद और लाहौर सहित विभिन्न शहरों में महसूस किए गए।
हालांकि अब तक किसी प्रकार के जान माल के नुकसान की कोई खबर नहीं हैं। भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का हिंदू कुश क्षेत्र बताया जा रहा है।
भूकंप का फल -प्राचीन विज्ञान के हिसाब से इस भूकंप का केंद्र जल से संबंधित हैं जम्मू-कश्मीर में नदियों तालाबों के किनारे और ऐसे जल के संपर्क में अधिक रहने वाले लोग जल जनित बड़ी बीमारियों के शिकार होंगे !इन क्षेत्रों में तालाब आदि के संपर्क में रहने वाले लोग या गंदे जल का सेवन करने वाले लोग हों या गंदे जल में नहाने वाले लोग इस समय कई बड़ी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं कुल मिलाकर पानी के प्रदूषण से प्रदूषित वायु का स्पर्श होने से भी हो सकती हैं उल्टी दस्त एवं ज्वर जैसी अधिक दिनों तक चलने वाली कई बड़ी बीमारियाँ सरकार इनसे बचाव के लिए समय रहते यदि सचेत नहीं हो सकी तो इस वर्ष ये बीमारियाँ सरकार के नियंत्रण से बाहर भी जा सकती हैं पानी के किनारे रहने वाली जनता इन्हींबीमारियों से  भीषण त्राहित्राहि कर उठेगी ।वर्षा का प्रकोप होगा !
     इस भूकंप  से नदी के किनारे बसने वाले लोगों की बहुत बड़ी क्षति होगी । जल जनित बीमारियों जैसी बड़ी बाधाएँ निकट भविष्य में बहुत अधिक होना संभव हैं ।
       प्राचीन विज्ञान के हिसाब से ऐसे भूकंप का केंद्र जल से संबंधित होता है !जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र में जलजनित गैसों के प्रकोप से ये भूकम्प आया  है इस भूकंप  से नदी के किनारे बसने वाले लोगों की बहुत बड़ी क्षति होगी । जल जनित बीमारियों से बचने के लिए नदी तालाब आदि के जलों के संपर्क में रहने से अधिक से अधिक बचने का प्रयास करें!
      भूकंप का दिखा असर -भूकंप आने के कुछ  पहले से ही ये क्षेत्र भीषण वर्षा और बाढ़  शिकार हुआ इसी का असर उत्तर क्षेत्र  में 6 महीने तक दिखने की संभावना है |  

  भूकंप भारत पाक सीमा पर 8 -7- 2017 \15.43 बजे तीव्रता 5.2 'चन्द्रज' भूकंपइस भूकंप का फल -      इस समय भूकंप की सूचना के अनुशार भारत पकिस्तान के बीच लम्बे समय से चलते आ रहे संघर्ष  को घटाने के प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं जिनमें सफलता मिलने की संभावना विशेष अधिक होगी !भारत और पाकिस्तान की सीमा में रहने वाले लोगों की मानसिकता बदलने का संकेत देता है भूकंप |फिर भी भारत विरोधी लक्ष्य लेकर जीने वाले आतंकवादियों से तो सतर्कता बरती जानी ही चाहिए किंतु स्थानीय लोगों  में इस समय उन्माद की मात्रा अत्यंत घटती चलीजाएगी | आतंकवादियों को इस समय यहाँ के लोगों का पत्थरबाजी और पागलपन जैसा बिल्कुल सहयोग नहीं मिलेगा जिससे निराश हताश आतंकी कोई चोट देने में भले सफल हो  जाएँ बाकी सामान्य रूप से अगले 6 महीनों तक यहाँ का वातावरण शांतिप्रिय बना रहेगा ! जम्मू कश्मीर में फैले उन्माद की शांति की घोषणा करती भूकंपीय शक्तियाँ !भारत और पकिस्तान के आपसी संबंध सुधारने की मानसिकता बनाने की घोषणा !प्राचीन विज्ञान के हिसाब से चंद्र किरणों के प्रभाव से यह भूकंप प्रकट हुआ है 'चन्द्रज' भूकंप होने के कारण इसमें वर्षा और बाढ़ से सतर्कता बरती जानी चाहिए भारत पाक सीमा में पड़ने वाले नदी सरोवरों में जल की अत्यधिक वृद्धि होगी नदी सरोवरों के आस पास रहने वाले लोगों में जल जनित बीमारियों का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाएगा ! भूकंप का केंद्र चंद्र से संबंधित है इसलिए जम्मू-कश्मीर एवं उससे जुड़ी हुई पाक सीमा में पड़ने वाले नदियों तालाबों के किनारे और ऐसे जल के संपर्क में अधिक रहने वाले लोग जल जनित बड़ी बीमारियों के शिकार होंगे !   इन क्षेत्रों में तालाब आदि के संपर्क में रहने वाले लोग नहाने धोने एवं पीने के पानी का भी विशेष सतर्कता से प्रयोग करें क्योंकि उसका असर विपरीत होने की अधिक संभावनाएँ रहेंगी !सीमा पर तैनात सैनिकों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए |पत्थरवाजों से निरंतर जूझते सेना के जवानों को सतर्कता तो बरतनी ही पड़ेगी किंतु इस 'चन्द्रज'भूकंप के बाद इस क्षेत्र में उत्तेजना फैलाने वाले वर्ग को भी सद्बुद्धि आएगी !30 -8-2017 तक के लिए वातावरण शांत हो जाएगा ! भारत पाक सीमा पर ये शांति20-12-2017 तक रहेगी !इसी समय तक जलजनित कई बड़ी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं यहाँ रहने वाले लोग ! कुल मिलाकर पानी के प्रदूषण से प्रदूषित वायु का स्पर्श होने से भी हो सकती हैं उल्टी दस्त एवं ज्वर जैसी अधिक दिनों तक चलने वाली कई बड़ी बीमारियाँ सरकार इनसे बचाव के लिए समय रहते यदि सचेत नहीं हो सकी तो उपर्युक्तसमय तक ये बीमारियाँ सरकार के नियंत्रण से बाहर भी जा सकती हैं पानी के किनारे रहने वाली जनता इन्हीं बीमारियों से  विशेष परेशान होगी | इस भूकंप  से नदी के किनारे बसने वाले लोगों की क्षति होगी । जल जनित बीमारियों जैसी बड़ी बाधाएँ निकट भविष्य में अधिक होना संभव हैं।इस भूकंप का विशेष प्रभाव 30 -8-2017 तक रहेगा !भारत पाक सीमा पर ये शांति20-12-2017 तक रहेगी किंतु जैसे जैसे समय बीतता जाएगा वैसे वैसे भूकंप का प्रभाव घटता जाएगा और भूकंप से सम्बंधित कही गई बातें भी सामान्य होती चली जाएँगी !     इस  क्षेत्र में जलजनित गैसों के प्रकोप से ये भूकम्प आया  है और उन्हीं गैसों के प्रकोप से ज्वर आदि बीमारियाँ अचानक बढ़ती चली जाएँगी !जैसे जैसे समय बीतेगा वैसे वैसे स्थिति सामान्य  होती जाएगी | 
      पुनः  इस भूकंप  से नदी के किनारे बसने वाले लोगों की बहुत बड़ी क्षति होगी । जल जनित बीमारियों से बचने के लिए नदी तालाब आदि के जलों के संपर्क में रहने से अधिक से अधिक बचने का प्रयास करें 
      भूकंप के बाद दिखा भूकंप का प्रभाव -
 चूँकि 8 -7- 2017 वाले इस भूकंप के द्वारा शान्ति का सन्देश दिया जा रहा है इसलिए भारत पाक सीमा पर भारतीयों और पाकिस्तानियों के द्वारा तनाव घटाने के प्रयास प्रारम्भ होंगे किंतु 8 -7- 2017 को म्यांमार में आए भूकंप से पूर्वी भारत समेत चीन आदि का वो संयुक्त क्षेत्र प्रभावित हुआ था वो उस क्षेत्र में उन्माद फैलाने वाला या उत्तेजना पैदा करने वाला था इसलिए वहाँ के लोग वहाँ पर तो उत्तेजना पहला ही सकते हैं साथ ही भारत के जिस भी भाग में उत्तेजना फैलती है उसके लिए देश के पूर्वोत्तर भूकंप प्रभावित भाग में रहने वाले लोगों को या इस सीमा से जुड़े चीन आदि देशों को जिम्मेदार माना जाना चाहिए !




दिल्ली -
22-8-2016 एवं 10-9-2016 को दिल्ली और हरियाणा में आए भूकम्प का फल !
    इस वर्ष दिल्ली और हरियाणा के यमुना किनारे वाले क्षेत्रों में वर्षाजनित ज्वर आदि बीमारियों से टूटेगा कई वर्षों का रिकार्ड !महामारी का स्वरूप भी ले सकती हैं ये बीमारियाँ सरकार जनता की सुरक्षा के लिए सतर्क रहे !25 अक्टूबर तक रहेगी अधिक दिक्कत !
       प्राचीन विज्ञान के हिसाब से इन दोनों भूकंपों के केंद्र जल से संबंधित हैं अतः दिल्ली और हरियाणा में यमुना के किनारे और यमुना जल के संपर्क में रहने वाले लोग जल जनित बड़ी बीमारियों के शिकार होंगे !जमुना नदी के अलावा भी इन क्षेत्रों में तालाब आदि के संपर्क में रहने वाले लोग या गंदे जल का सेवन करने वाले लोग हों या गंदे जल में नहाने वाले लोग इस समय कई बड़ी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं कुल मिलाकर पानी के प्रदूषण से प्रदूषित वायु का स्पर्श होने से भी हो सकती हैं उल्टी दस्त एवं ज्वर जैसी अधिक दिनों तक चलने वाली कई बड़ी बीमारियाँ सरकार इनसे बचाव के लिए समय रहते यदि सचेत नहीं हो सकी तो इस वर्ष ये बीमारियाँ सरकार के नियंत्रण से बाहर भी जा सकती हैं पानी के किनारे रहने वाली जनता इन्हीं बीमारियों से  भीषण त्राहि त्राहि कर उठेगी ।इस  भूकंप  से यमुना नदी के किनारे बसने वाले लोगों की बहुत बड़ी क्षति होगी । जल जनित बीमारियों जैसी बड़ी बाधाएँ निकट भविष्य में बहुत अधिक होना संभव हैं । इस भूकंप का फल आगामी 6 महीनों तक रहेगा !प्राचीन विज्ञान के हिसाब से ऐसे भूकंप का केंद्र जल से संबंधित होता है !दिल्ली और हरियाणा के क्षेत्र में जलजनित गैसों के प्रकोप से ये दोनों भूकम्प आए हैं और उन्हीं गैसों के प्रकोप से ज्वर आदि बीमारियाँ अचानक बढ़ती चली जाएँगी !इस भूकंप का असर 45 दिनों तक अधिक रहेगा उसके बाद धीरे धीरे सामान्य होता चला जाएगा और बीमारियाँ भी समय के साथ साथ धीरे धीरे घटती चली जाएँगी !बीमारियों से कई दशकों का रिकार्ड टूटेगा इस वर्ष !

दिल्ली में 17 -11-2016 को प्रातः 4:30 बजे आया भूकंप ! जानिए कि क्या होगा इसका असर !
दिल्ली और एनसीआर में गुरुवार तड़के करीब 4:30 बजे भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.2 मापी गई. राजस्थान और उत्तर भारत के कई राज्यों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए. 
इस भूकंप का फल -   इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा  पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग ! साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं ऐसे भूकंपों का प्रभाव तो 180 दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे  घटता चला जाता है तब भी 45 दिन विशेष भारी होते हैं ।दिल्ली को स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ आतंकवादी समस्याओं से भी विशेष सावधान रहना होगा ! इसलिए 1-1-2017 तक ऐसी  परिस्थिति बनी रहेगी ! 2-5जनवरी को ईश्वर की ओर से मिल सकता है अगला भूकंपीय सन्देश वो भूकंप ईश्वर के अगले आदेश से समाज को अवगत कराएगा उसके आधार पर आगे क्या होगा उसके वृत्तान्त का वर्णन किया जा सकेगा ! 

6-2-2017 को 22.35 बजे दिल्ली में आया 'वातज' भूकंप !इसकी तीव्रता 6.00
"दिल्ली एनसीआर में देर शाम भूकंप के झटके महसूस किए गए. देहरादून से भी खबर है कि भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं. भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में बताया गया है. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.3 मापी गई है.देहरादून , कुमाऊं, गढ़वाल ,पश्चिमी यूपी एवं पंजाब में भी झटके महसूस किए गए !"   अब देखिए इस भूकंप का फल !इस भूकंप का फल -    इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !   शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा  पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।     डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !     साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं ऐसे भूकंपों का प्रभाव तो 180 दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता चला जाता है तब भी 45 दिन विशेष भारी होते हैं ।दिल्ली को स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ आतंकवादी समस्याओं से भी विशेष सावधान रहना होगा ! इसलिए 29-3-2017 तक ऐसी  परिस्थिति बनी रहेगी !     फिल हाल अभी इसमें रूद्रप्रयाग  दिल्ली पिथौरागढ़ ,देहरादून , कुमाऊं, गढ़वाल ,पश्चिमी यूपी एवं पंजाब समेत समस्त क्षेत्र को आतंकवादी हमलों से विशेष सावधान रहना चाहिए ! सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है कि इस क्षेत्र में कोई तनाव न तैयार होने पाए !

भूकंप :दिल्ली-एनसीआर में 2- 6 -2017,4.24 AM,तीव्रता 5,'सूर्यज' भूकंप !भूकंपकेंद्र 'रोहतक'
अब जानिए क्या है इस भूकम्प का फल -   भूकंपीय क्षेत्र में अग्नि सम्बन्धी समस्याएँ बहुत अधिक भी बढ़ सकती हैं इस समय भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है इसलिए कभी भी कहीं भी आग लगने की दुर्घटनाएँ घट सकती हैं कुएँ तालाब नदियाँ आदि बहुत जल्दी सूखने लगेंगी !वर्षा की संभावनाएँ अत्यंत कमजोर हो जाएंगी भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में अगले 50 दिनों तक वर्षा की संभावनाएँ बिलकुल न के बराबर होंगी !      गर्मी से संबंधित रोग विशेष रूप से पनपेंगे  इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं ।      इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि का जलस्तर तेजी से घटेगा !पित्त अर्थात गर्मी से संबंधित रोगों से सतर्क रहना चाहिए !      यहीं से शुरू होकर रोहतक में लोगों के आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे लोग एक दूसरे मरने पर उतारू हो जाएंगे निकट भविष्य में अशांति संभव है लोगों के आपसी सम्बन्धों में कटुता बढ़ती चली जाएगी !उचित होगा कि  17 -7 - 2017 तक लोगों के आपसी विश्वास को बढ़ाए  और बनाए रखा जाए ।वैसे तो इस भूकंप का दुष्प्रभाव 5 -12-2017 तक रहेगा इसलिए सरकार की ओर से भी विशेष  सावधानी बरती जानी चाहिए  !     इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बढ़ने की सम्भावना है !इसका विशेष दुष्प्रभाव अभी से लेकर17 -7 - 2017 तक रहेगा किंतु जैसा जैसा समय बीतता जाएगा वैसा वैसा घटता जाएगा दुष्प्रभाव !









पकिस्तान  
31-8-2016 सुबह तड़के PAK-चीनभूकंप के ज़बरदस्त झटकों से 'थर्राया'
      31 अगस्त 2016 से भारत के विरुद्ध चीन और पकिस्तान के संयुक्त प्रयास प्रारम्भ होंगे जिनसे भारत को बड़ा नुक्सान पहुँचा सकते हैं !इसलिए सरकार  को बहुत सतर्क रहना चाहिए फरवरी 2017 तक पाकिस्तान और चीन मिलकर कोई बड़ा षड्यंत्र कर सकते हैं भारत के खिलाफ !इसलिए इस समय के बीच भारत सरकार  को  भी बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए !
       इस  भूकंप के प्रभाव से चीन और पाकिस्तान के लोगों में आपसी शांति का कारक होगा दोनों देशों आपसी मित्रता बढ़ेगी ।इस भूकंप के प्रभाव से यहाँ के लोगों के बीच आपसी भाईचारे की भावना का निर्माण हो!लोगों के बीच आपसी संबंध सामान्य बनाने के प्रयास फलीभूत होंगे ! सहन शीलता बढ़ेगी इस भूकंप का फल आगामी 6 महीनों तक रहेगा !

 भूकंप भारत और पाकिस्तान में - 1-10-2016 \ दोपहर 1:34 मिनट पर तीव्रता 5.5 थी।    भूकंप के झटके पेशावर, गिलगिट, इस्लामाबाद और खैबर -पख्तूनख्वा प्रांत के कुछ हिस्सो में महसूस किए गए।इस भूकंप के झटके कश्मीर घाटी में भी महसूस किए गए !     इस भूकंप का फल -   भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलेंगी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़े ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !   शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा  पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में गर्व महसूस  करेंगे ।डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !इस भूकंप के आने के बाद अक्टूबर 2016 की 3,4,7,15,30तारीखों को एवं नवंबर की 14 तारीख को भूकंप आने की प्रबल सम्भावना बनी रहती है किंतु यदि ऐसा  हुआ तो ऐसे भूकंप से प्रभावित देशों के शासकों के लिए बड़ा संकट पैदा करता है यह भूकम्प !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं ऐसे भूकंपों का प्रभाव तो 180 दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता जाता है तब भी 45 दिन विशेष भारी होते हैं ।यदि बीच में कोई दूसरे भूकंप आए या प्रकृति में इससे जुड़ी कोई और घटना घटी तो प्रभाव मिश्रित अर्थात मिला जुला दिखने लगता है ! चूँकि इस भूकंप का केंद्र पाकिस्तान में था और इसका प्रभाव कश्मीर तक में था इसलिए इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोग मरने मारने के लिए उतावले हो  सकतें हैं जिनके पागलपन को पचाने की सामर्थ्य भारत को पैदा करने होगी !इसमें ध्यान देने लायक विशेष बात यह है कि इस भूकंप के झटके इस्लामाबाद में तो लगे हैं किंतु दिल्ली में नहीं लगे हैं !इस्लामाबाद पाकिस्तान की राजधानी होने के कारण पाकिस्तान की सत्ता का केंद्र इस्लामाबाद होना स्वाभाविक है देश से संबंधित सारे निर्णय वहीं लिया जाना भी स्वाभाविक है ! इसलिए हमें यह निश्चित मानना चाहिए कि इस पागलपन में पकिस्तान की सरकार तो सम्मिलित होगी किंतु भारत की सरकार परिपक्वता का परिचय देगी तथापि भारत सरकार को 14 नवम्बर तक अपना सुरक्षा तंत्र विशेष मजबूत रखना चाहिए।भूकंप से प्रभावित पाकिस्तानियों और भूकंपीकश्मीरियों का ये पागलपन भारत को कोई बड़ी चोट न दे जाए ! क्योंकि पाकिस्तानी और कश्मीरी अलगाववादी बड़ी वारदातों को भी अंजाम दे सकते हैं इससे इनकार नहीं किया जा सकता है ।




असम -

15-11-2016 को प्रातः 7.40 बजे 5.0 तीव्रता का असम में भूकंप

   मंगलवार को नॉर्थ ईस्ट के 7 राज्यों में 5.0 तीव्रता का पैत्तिक प्रवृत्ति  का भूकंप (कृ)आया , भूकंप का केंद्र बांग्लादेश से सटे असम के करीमगंज जिले में था. 

   इस समय इस भूकंपीय क्षेत्र के वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय  ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है । इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं ।

     इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि अबकी बार बहुत जल्दी ही सूखते चले जाएँगे !यहीं से शुरू होकर भारत और बांग्लादेश के मध्य आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन अत्यंत तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे निकट भविष्य में भारत और बांग्लादेश बीच आपसी सम्बन्धों में कटुता इतनी अधिक बढ़ती चली जाएगी कि अभी से सतर्कता बरती जानी बहुत आवश्यक है ।इसलिए उचित होगा कि भारत पड़ोसी देश पर कम से कम मई 2017  तक विश्वास करना बिलकुल बंद कर दे पड़ोसी के द्वारा कभी भी कैसा भी कोई भी विश्वास घात संभव है !

     इसके अलावा भी असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर आदि में लोगों को अकारण क्रोध आएगा और आपस में वैमनस्य फैलेगा समाज में विद्रोह का वातावरण बनेगा जो इन क्षेत्रों की अशांति का प्रमुख कारण  होगा !केंद्र सरकार को इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान रखते हुए सावधान रहना चाहिए यहाँ थोड़ी भी विद्रोह की चिनगारी बहुत बड़े ज्वालपुंज को जन्म दे सकती है सरकार और समाज सतर्क रहे !

    इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बहुत अधिक बढ़ जाने की सम्भावना है !सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग ओर से इस दिशा में विशेष सतर्कता बरती जानी चाहिए !इसका विशेष दुष्प्रभाव अभी से लेकर मई  2017 तक रहेगा किंतु जैसा जैसा समय बीतता जाएगा वैसा वैसा घटता जाएगा दुष्प्रभाव



भूकंप 11-12-2016 ,7.27AM,तीव्रता 4.2, पूर्वोत्तर के सभी सात राज्य !
                                          पित्तज भूकंप :   "पूर्वोत्तर के सभी सात राज्य- असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर आदि में भूकंप का केंद्र मेघालय के पश्चिम खासी जिले में था। भूकंप के झटके सुबह करीब 7.27 बजे महसूस किए गए।        इस समय इस भूकंपीय क्षेत्र के वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है । इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं ।
     इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि बहुत जल्दी ही सूखते चले जाएँगे !यहीं से शुरू होकर भारत और चीन बांग्लादेश के मध्य आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन अत्यंत तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे निकट भविष्य में भारत और चीन बांग्लादेश के बीच आपसी सम्बन्धों में कटुता इतनी अधिक बढ़ती चली जाएगी कि अभी से सतर्कता बरती जानी बहुत आवश्यक है ।इसलिए उचित होगा कि भारत इन पड़ोसी देशों पर कम से कम जून 2017  तक विश्वास करना बिलकुल बंद कर दे इनके द्वारा कभी भी कैसा भी कोई भी विश्वास घात संभव है !
     इसके अलावा भी असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर आदि में लोगों को अकारण क्रोध आएगा और आपस में वैमनस्य फैलेगा समाज में विद्रोह का वातावरण बनेगा जो इन क्षेत्र की अशांति का प्रमुख कारण  होगा !केंद्र सरकार को इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान रखते हुए सावधान रहना चाहिए यहाँ थोड़ी भी विद्रोह की चिनगारी बहुत बड़े ज्वालपुंज को जन्म दे सकती है सरकार और समाज सतर्क रहे !
    इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बहुत अधिक बढ़ जाने की सम्भावना है !सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग ओर से इस दिशा में विशेष सतर्कता बरती जानी चाहिए !इसका विशेष दुष्प्रभाव अभी से लेकर जून  2017 तक रहेगा किंतु जैसा जैसा समय बीतता जाएगा वैसा वैसा घटता जाएगा दुष्प्रभाव !"
     भूकंप के बाद दिखा भूकंप का प्रभाव -
        इस भूकंप के बाद से अचानक  मणिपुर आदि में पहले से चली आ रही हिंसक घटनाएँ बहुत अधिक बढ़ गईं !मणिपुर के इंफाल पूर्व जिले में कर्फ्यू, हिंसक झड़पों के बाद बसें जलाई गई !मणिपुर में क्यों गुस्से में थे प्रदर्शनकारी?मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद,मणिपुर में बंद तो पहले से ही चल रहा था किंतु इस आंदोलन ने उग्र रूप इस भूकंप के बाद ही लिया !पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में बड़ी आतंकी घुसपैठ पर बांग्लादेश ने चेताया ! ये तनाव 6 महीने आगे तक चलने की संभावना है |

भूकंप :24 -2-2017 शाम पांच बजकर 32 मिनट पर मणिपुर में आया "सन्निपातज"भूकंप

 भूकंप  "सन्निपातज"
 मणिपुर में शुक्रवार को मध्यम तीव्रता वाले भूकंप का झटका महसूस किया गया. इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.2 मापी गई.इससे पहले तड़के तीन बजकर नौ मिनट पर सिक्किम में भूकंप का झटका महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 3.5 मापी गई.

इन दोनों भूकंपों का फल -

"आकाश में बड़े बड़े काले काले गंभीर शब्द करने वाले बादल आने लगते हैं आवश्यकता के अनुशार वर्षा करते हैं । यह भूकंप मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री एवं वहां के संगठन प्रमुखों के लिए सभी प्रकार से हानिकारक है इनकी सुरक्षा की विशेष चिंता की जानी चाहिए !प्रधानमंत्री की यात्रा के एकदिन पहले आया भूकंप संभव है कि सत्ता परिवर्तन करके मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के दलों के अलावा किसी अन्य दल या संगठन को सत्ता हस्तांतरित करने की सूचना देने आया हो भूकंप !ये भूकंप 25 फरवरी को मोदी जी की रैली में अनहोनी की चेतावनी देने आया था प्रशासन की विशेष सतर्कता से टाला जा सका !दूसरी बात मणिपुर में किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने का सीधा सा मतलब है कि जनता केंद्र वा प्रांत की सरकारों के दलों को बहुमत नहीं दिया है ।यह सत्ता परिवर्तन का इशारा है !
             भूकंप के बाद दिखा भूकंप का प्रभाव -
      25 फरवरी को मोदी जी की रैली इंफाल के अचोउआ में होने वाली थी इसी बीच 24 फरवरी को एक हथगोला बीजेपी के उम्मीदवार निंगोमबाम लेकाई में  पाया गया.तो दूसरा बम थाउबल जिले में बीजेपी कार्यकर्ता के घर के सामने पाया गया. यह जगह रैली के स्थान से 40 किमी. दूर है.! कुल मिलाकर भूकंप विज्ञान की दृष्टि से ये भूकंप वहाँ के मुख्यमंत्री  प्रधानमंत्री जी आदि के लिए विशेष भय के संकेत दे रहा था |

भूकंप :मणिपुर 4-3- 2017 सुबह 05:08 पर तीव्रता 3.5 ,'पित्तज 'भूकंप !अब जानिए क्या है इस भूकम्प का फल -   अग्नि सम्बन्धी समस्याएँ बहुत अधिक भी बढ़ सकती हैं इस समय भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है । इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं । इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि का जलस्तर तेजी से घटेगा !पित्त अर्थात गर्मी से संबंधित रोगों से सतर्क रहना चाहिए !      यहीं से शुरू होकर मणिपुर में लोगों के आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे निकट भविष्य में अशांति संभव है लोगों के आपसी सम्बन्धों में कटुता बढ़ती चली जाएगी !उचित होगा कि 19 -4 - 2017 तक लोगों के आपसी विश्वास को बढ़ाए  और बनाए रखा जाए ।    इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बढ़ने की सम्भावना है !इसका विशेष दुष्प्रभाव अभी से लेकर19 -4 - 2017तक रहेगा किंतु जैसा जैसा समय बीतता जाएगा वैसा वैसा घटता जाएगा दुष्प्रभाव !
     भूकंप का दिखा उत्तेजनात्मक असर - ये आगामी 6 महीनों तक चलने की संभावना है !




बनासकांठा  -
भूकंप 13 -3-2017 को 15.52 बजे बनासकांठा  जिले में 4.4 की तीव्रता वाला 'वातज'भूकंप !
अब देखिए इस भूकंप का फल !   इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !   शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा  पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।     डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !     साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं ऐसे भूकंपों का प्रभाव तो 180 दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता चला जाता है तब भी 45 दिन विशेष भारी होते हैं ।इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र को 28-4-2017 तक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ आतंकवादी समस्याओं से भी विशेष सावधान रहना होगा ! सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है कि इस क्षेत्र में कोई तनाव न तैयार होने पाए !
                  भूकंप के बाद दिखा भूकंप का प्रभाव -
   गुजरात के पाटन में दंगा, दो की मौत: 5000 लोगों की भीड़ ने बोला हमला, 20 घर फूंके, कई मुस्लिम परिवारों ने छोड़ा गांव !ध्यान रहे कि बनासकांठा  जिला और पाटन दोनों पास पास पड़ते हैं ! भूकंप के प्रभाव से ही यहाँ ऐसा हुआ ! 




त्रिपुरा -
     13 -04-2016को आए भूकंप का केंद्र म्यांमार था उत्तर- पूर्वी भारत और त्रिपुरा के अगरतला में भी !
   फल -ये भूकंप इस क्षेत्र के लोगों में आपसी शांति का कारक होगा  देशों एवं लोगों के बीच आपसी सद्भावना का निर्माण करेगा और इस सात्विक सोच का असर वर्तमान भारत चीन संबंधों में भी सकारात्मक दिखेगा आपसी संबंध सामान्य बनाने के प्रयास फलीभूत होंगे ! इस भूकंप का फल आगामी 6 महीनों तक रहेगा !इसमें भारत चीन संबंधों को सामान्य बनाने के सफल प्रयास होंगे ।     
      प्राचीन विज्ञान के हिसाब से ऐसे भूकंप का केंद्र जल से संबंधित होता है ! समुद्र में हुई जलीय हलचलों से निर्मित गैसों का भूकंप के रूप में प्रकटीकरण माना जाना चाहिए ! वैसे शास्त्रीय मान्यताओं के हिसाब से तो ये भूकंप जल जनित ही माना गया है ।
    दूसरी बात ऐसे जलीय भूकंपों  में  आफ्टर शॉक्स नहीं आया करते हैं एक बार ही भूकम्प आता है बस !तीसरी बात ऐसे भूकंपों से समुद्रों और नदियों के किनारे बसने वाले लोगों की बड़ी क्षति होती है जल जनित बीमारियाँअतिवृष्टि या सुनामी जैसी बाधाएँ निकट भविष्य में संभव हैं ।

3-1- 2017 को 14.39 बजे त्रिपुरा में भूकंप !तीव्रता 5.5-7'कफज' भूकंप (श)! इसके प्रभाव से कई महीने से जारी मणिपुर आदि पूर्वोत्तर राज्यों क्षेत्रों में बीते कई महीने से चली आ रही हिंसा संपूर्ण रूप से शांत होती चली जाएगी !      त्रिपुरा के अंबासा में मंगलवार दोपहर 2 बजकर 42    मिनट पर 5.5 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से 59 किमी दूर अंबासा और कुमारघाट के बीच लोंगतोराई पहाड़ी भूकंप का केंद्र रहा। भूकंप के झटके भारत के असम, त्रिपुरा के अलावा पड़ोसी देश बांग्लादेश, भूटान और उत्तरी म्यांमार में भी महसूस किए गए।अगरतला समेत मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और दक्षिणी असम तक महसूस किए गए। अब जानिए इस भूकंप का फल-    इस भूकम्प से प्रभावित क्षेत्र में वर्षा बाढ़ का प्रकोप विशेष बढ़ सकता है नदियों तालाबों एवं समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों के लिए विशेष हानिकारक हो सकता है इसमें कफज एवं जलजनित बीमारियाँ अधिक बढ़ सकती हैं अतिवृष्टि और बाढ़ से परेशानियाँ बढ़ सकती हैं !इनसे निपटने के लिए सावधानी और सतर्कता तो रखी ही जानी चाहिए !     इस भूकंप के प्रभाव से पड़ोसी बांग्लादेश, भूटान और उत्तरी म्यांमार एवं भारत के त्रिपुरा ,अगरतला समेत मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और दक्षिणी असम में वर्षा बाढ़ एवं जल जनित बीमारियों की बड़ी सम्भावना है इसके साथ साथ इस भूकंप का एक बहुत अच्छा फल यह भी है कि इस क्षेत्र के लोगों और देशों के आपसी संबंधों में मधुरता आएगी । इस भूकंप से  प्रभावित लोग और देश सभी प्रकार के आपसी शिकायत शिकवे भुलाकर आपस में मिलजुल कर शांति पूर्ण ढंग से काम करना पसंद करेंगे !इस क्षेत्र की आम जनता में भी हिंसा मुक्त वातावरण बनेगा !लोगों की मानसिकता एक दूसरे के प्रति संवेदन शील और सात्विक बनेगी !इस भूकंप का इस प्रकार का असर वैसे तो 3-1- 2017 से 18-2-2017 तक विशेष रहेगा इसके बाद धीरे धीरे घटता चला जाएगा !जबकि इसका सामान्य असर तो 7-6-2016 तक रहेगा !       भारत बाँगलादेश , भूटान और वर्मा की सरकारों को चाहिए कि इस बीच आपसी विवादित मुद्दों को निपटाकर एक दूसरे के सहयोग से आपसी विकास के लिए मजबूत महत्वपूर्ण रास्ते खोजें !इन विषयों में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है !      
 एक और विशेष बात :
    11-12-2016 ,7.27AM,तीव्रता 4.2, पूर्वोत्तर के सभी सात राज्यों में जो भूकंप आया था   वो पित्तज होने के कारण विशेष अमंगल कारी क्रोध कारक एवं हिंसा लड़ाई झगड़े को प्रोत्साहित करने वाला था उसका दुष्प्रभाव यद्यपि जून 2017 तक रहने वाला था अर्थात अशुभ था !किंतु इसी क्षेत्र में 3-1- 2017 को आया भूकंप पिछले भूकंप के जून 2017 तक चलने वाले दुष्प्रभाव को यहीं से समाप्त होने की घोषणा करता है । अतएव  क्षेत्र में इसके बाद पूर्ण सुख शांति युक्त वातावरण का निर्माण होगा !
     भूकंप के बाद दिखा  भूकंप का असर - 
   पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में बड़ी आतंकी घुसपैठ पर बांग्लादेश ने चेताया !



नेपाल -

नेपाल में  28-11-2016 प्रातः 5.5 पर भूकंप आया ! इसकी थी तीव्रता 5.6 ,जानिए इसका असर !
           नेपाल में आया 'पित्तज' (वि)भूकंप !    नेपाल में तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए जिनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.6  मापी गई. भूकंप सुबह पांच बजकर पांच मिनट पर 10 किलोमीटर की गहराई में आया. नेपाल के नेशनल साइज्मोलॉजिकल सेंटर ने बताया कि भूकंप का केंद्र काठमांडो से करीब 150 किलोमीटर पूर्व में एवरेस्ट क्षेत्र के निकट सोलुखुम्बु जिले में था.     अब जानिए क्या है इस भूकम्प का फल -   अग्नि सम्बन्धी समस्याएँ और अधिक भी बढ़ सकती हैं इस समय भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है । इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं ।
     इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि का जलस्तर तेजी से घटेगा !पित्त अर्थात गर्मी से संबंधित रोगों से सतर्क रहना चाहिए !
     यहीं से शुरू होकर नेपाल और चीन के मध्य आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे निकट भविष्य में नेपाल और चीन के बीच आपसी सम्बन्धों में कटुता बढ़ती चली जाएगी !नेपाल के लिए उचित होगा कि चीन पर कम से कम 13-1-2017 तक विश्वास करना बिलकुल बंद कर दे पड़ोसी के द्वारा कभी भी कैसा भी कोई भी विश्वास घात संभव है !
    इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बढ़ने की सम्भावना है !शर्दी का मौसम होने से कुछ बचाव हो सकता है !इसका विशेष दुष्प्रभाव अभी से लेकर 13-1-2017 तक रहेगा किंतु जैसा जैसा समय बीतता जाएगा वैसा वैसा घटता जाएगा दुष्प्रभाव !"
     भूकंप के बाद दिखा भूकंप का प्रभाव -
     चीन ने नेपाल के साथ मिलकर भारत को दिया ये बड़ा झटका !भारत को चोट देने वाली ये डील पक्की तो 28 -11 -2016 के भूकंप के तुरन्त बाद हुई किंतु घोषणा 8 दिसंबर को हुई !किंतु ये भूकंप के पहले बनी आपसी सहमति थी जबकि चीन और नेपाल के बीच इसके बाद अगले 6 महीने तक ऐसी किसी भी मधुरता का कोई सन्देश मिलने की संभावना नहीं रहेगी !



 भूकंप 1-12-2016 को,तीव्रता 5.2,गुरुवार रात 10 बजकर 35 पर भारत-नेपाल सीमा,उत्तराखंड के धारचूला में केंद्र ! ! 
 कफज भूकंप और उसका फल !   दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में भूकंप के झटके, यह इलाका भारत-नेपाल सीमा पर स्थित है। भूकंप के झटकों से पड़ोसी देश नेपाल भी हिल गया। वहीं, बताया गया है कि उत्तराखंड के बागेश्वर, चामोली समेत कुमाऊं और गढ़वाल में भी तेज झटके महसूस किए गए।भूकंप के झटके सबसे ज्यादा उत्तराखंड के श्रीनगर, चमोली, चंपावत, अल्मोड़ा और बागेश्वर में महसूस किए गए।      अब जानिए इस भूकंप का फल-    इस भूकम्प से प्रभावित क्षेत्र में वर्षा बाढ़ का प्रकोप विशेष बढ़ सकता है नदियों तालाबों एवं समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों के लिए विशेष हानिकारक हो सकता है इसमें कफज एवं जलजनित बीमारियाँ अधिक बढ़ सकती हैं !संभव हैं अथवा अतिवृष्टि और बाढ़ से परेशानियाँ बढ़ें !किंतु माध्यम तीव्रता का भूकंप होने के कारण इसका प्रभाव भी मध्यम ही रहेगा इसलिए विशेष चिंता की बात नहीं है !फिर भी सावधानी और सतर्कता तो रखी ही जानी चाहिए !     इस भूकंप के प्रभाव से भारत और नेपाल के बीच आपसी संबंधों में मधुरता आएगी दोनों देश आपसी शिकायत शिकवे भुलाकर एक दूसरे के साथ मिलजुल कर शांति पूर्ण ढंग से काम करना पसंद करेंगे !इस क्षेत्र की आम जनता में भी हिंसा मुक्त वातावरण बनेगा !लोगों की मानसिकता एक दूसरे के प्रति संवेदन शील बनी रहेगी रहेगी !इस भूकंप का असर वैसे तो 1-5-2017 किंतु 15-1 -2017 इसका प्रभाव विशेष देखने को मिलेगा !       भारत और नेपाल सरकारों को चाहिए कि इस बीच आपसी विवादित मुद्दों को निपटाकर एक दूसरे के सहयोग से दोनों देशों के विकास के लिए मजबूत महत्वपूर्ण रास्ते खोजे जा सकते हैं !आगे के 180दिनों का सदुपयोग भारत और नेपाल दोनों ही देशों की सरकारों को करना चाहिए !  भारत के लिए विशेष अवसर प्रदान कर रहा है यह भूकंप :

भूकंप नेपाल में 27 फ़रवरी 2017 को -"पित्तज भूकंप"      
नेपाल में मध्यम तीव्रता वाले भूकंप के दो झटके महसूस किए गए स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजकर 22 मिनट पर 4.6 तीव्रता का भूकंप आया. इसके बाद सुबह 10 बजकर छह मिनट पर 4.7 तीव्रता का भूकंप आया.  अब जानिए क्या है इस भूकम्प का फल -   अग्नि सम्बन्धी समस्याएँ बहुत अधिक भी बढ़ सकती हैं इस समय भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है । इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं ।      इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि का जलस्तर तेजी से घटेगा !पित्त अर्थात गर्मी से संबंधित रोगों से सतर्क रहना चाहिए !      यहीं से शुरू होकर नेपाल में आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे निकट भविष्य में नेपाल में अशांति संभव है लोगों के आपसी सम्बन्धों में कटुता बढ़ती चली जाएगी !नेपाल के लिए उचित होगा कि 13-4-2017 तक लोगों के आपसी विश्वास को बढ़ाए  और बनाए रखे ।    इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बढ़ने की सम्भावना है !इसका विशेष दुष्प्रभाव अभी से लेकर 13-4 -2017 तक रहेगा किंतु जैसा जैसा समय बीतता जाएगा वैसा वैसा घटता जाएगा दुष्प्रभाव !
       भूकंप का दिखा उत्तेजनात्मक असर - सीमा पर बढ़ा तनाव, किसानों को डर-गेहूं की तैयार फसल में आग लगा सकते हैं नेपाली !और भी तमाम प्रकार के तनावों का सामना कर रहा था ये क्षेत्र !
 नेपाल और म्यांमार में भूकंप 'वातज' 2-7-2017 \ रविवार को 7.28 AM \ तीव्रता 4.9 एवं 10 :49 AM बजे भी !
 यह भूकंप नेपाल,म्यांमार और भारत सीमा में आया इसका मुख्य केंद्र  म्यांमार-भारत सीमा रहा. 
 अब देखिए इस भूकंप का फल !    इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !   शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा  पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !     साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं ऐसे भूकंपों का प्रभाव तो 2-12-2017दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता चला जाता है तब भी 17-8-2017 का समय विशेष भारी होगा ।इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र को तब तक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ आतंकवादी समस्याओं से भी विशेष सावधान रहना होगा ! सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है कि इस क्षेत्र में कोई तनाव न तैयार होने पाए !





म्यांमार -
13 -4-2016  को म्यांमार भारत चीन में आया 'चन्द्रज' भूकंप !  इसका केंद्र म्यांमार था 
     किंतु पूर्वोत्तर भारत समेत बहुत बड़े भूभाग को इस भूकंप ने प्रभावित किया था
वैदिक वांग्मय के अनुशार इस भूकंप के आने का फल मैंने अपने ब्लॉग पर इस नाम से ही उसी दिन प्रकाशित कर दिया था उसके बाद वो पेज कभी खोला नहीं गया और न ही कोई संशोधन किया गया !ये है वो लेख -
   "भूकंप (13 -04-2016) के प्रभाव से भारत और चीन के आपसी संबंध होंगे मधुर !
 13 -04-2016 को 19. 28 बजे देश के पूर्वोत्तर में आया था भूकंप  ! इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में अति शीघ्र अधिक वर्षा बाढ़ से हो सकती भारी क्षति !जबकि समाज में व्याप्त असंतोष एवं आपसी  बैर विरोध की भावना घटेगी और भाईचारे का वातावरण बनेगा !विशेष बात यह है कि इस भूकंप में आफ्टर शॉक्स नहीं आतेहैं !
 13-04-2016 को आए भूकंप की शास्त्र वर्णित विशेषताएँ - 
       बंधुओ ! किसी भी भूकंप के कारण जन धन की हानि तो होती ही है किंतु भूकंप प्रभाव से होने वाले शकुन अपशकुनों की दृष्टि से यदि देखा जाए  तो ये भूकंप इस क्षेत्र के लोगों में आपसी शांति का कारक होगा  देशों एवं लोगों के बीच आपसी सद्भावना का निर्माण करेगा और इस सात्विक सोच का असर वर्तमान भारत चीन संबंधों में भी सकारात्मक दिखेगा आपसी संबंध सामान्य बनाने के प्रयास फलीभूत होंगे ! इस भूकंप का फल आगामी 6 महीनों तक रहेगा !इसमें भारत चीन संबंधों को सामान्य बनाने के सफल प्रयास होंगे ।
      प्राचीन विज्ञान के हिसाब से ऐसे भूकंप का केंद्र जल से संबंधित होता है ! समुद्र में हुई जलीय हलचलों से निर्मित गैसों का भूकंप के रूप में प्रकटीकरण माना जाना चाहिए ! वैसे शास्त्रीय मान्यताओं के हिसाब से तो ये भूकंप जल जनित ही माना गया है ।
 दूसरी बात ऐसे जलीय भूकंपों  में  आफ्टर शॉक्स नहीं आया करते हैं एक बार ही भूकम्प आता है बस !तीसरी बात ऐसे भूकंपों से समुद्रों और नदियों के किनारे बसने वाले लोगों की बड़ी क्षति होती है जल जनित बीमारियाँअतिवृष्टि या सुनामी जैसी बाधाएँ निकट भविष्य में संभव हैं ।
      इस भूकंप के बाद चीन के साथ भारत के संबंधों में भी मधुरता आई थी साथ ही पूर्वी भारत के पूर्वी जिलों में कुछ महीनों तक लगातार भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति बनी रही थी !यद्यपि वर्षा और बाढ़ की संभावनाएँ इस क्षेत्र में विशेष रहती ही हैं फिर भी भूकंपजनित फलों को नकारा कैसे जा सकता है !

पूर्वी भारत म्यांमारमें भूकंप के झटके 24-8-2016 \ 16.5 बजे !
    भूकंप का केंद्र म्यांमार में जमीन से 58 किमी. नीचे था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.8 मापी गई।  
  " म्यांमार से लेकर पूर्वोत्तर भारत में पश्चिम बंगाल ,उत्तरप्रदेश ,बिहार ,झारखंड,उड़ीसा ,असम, अरुणाचलप्रदेश, नगालैंड, त्रिपुरा, मणिपुर और मिजोरम आदि में  भूकंप का तगड़ा झटका महसूस किया गया। कोलकाता, पटना, दरभंगा, गुवाहाटी और लखनऊ में भूकंप के झटके महसूस किए गए।"
   भूकंप से प्रभावित प्रदेशों में पिछले 4 महीने से भीषण वर्षा और बाढ़ से मची त्राहि त्राहि प्रभाव पूर्वक अब तुरंत समाप्त हो जाएगी इस भूकंप से प्रभावित प्रदेशों में पिछले 4 महीने से चली आ रही वर्षात अब तुरंत बंद हो जाएगी ! बाढ़ पे अतिशीघ्र अंकुश लग जाएगा नदियाँ कुएँ तालाब आदि बाढ़ की अतिविशाल जल राशि को अतिशीघ्र स्वयं पी जाएँगे !पूर्वी क्षेत्रों में समुद्र  के समान फैला बाढ़ का यह विशाल पानी  कुछ ही दिनों में अतिशीघ्र सूख कर गया कहाँ इसका अनुमान भी लगाना कठिन होगा ! भूकंप से प्रभावित बाढ़ पीड़ित प्रदेशों की असहाय सरकारें एवं आपदा प्रबंधन विभाग राहत की सांस लेगा !सरकारें एवं आपदा प्रबंधन विभाग पूर्वोत्तर भारत की जिस बाढ़ को देखकर लाचार है वह अतिशीघ्र स्वयं समाप्त हो जाएगी !यहाँ तक कि जमीन की नमी बहुत जल्दी सूख जाएगी तथा अग्नि एवं गर्मी से संबंधित प्रकोप बढ़ेंगे पित्त प्रकुपित होने से संभावित बीमारियाँ फैलेंगी !
   पूर्वोत्तर भारत में असंतोष पनपेगा !यहाँ के लोग आपस में एक दूसरे के साथ हिंसक वर्ताव करने लगेंगे !चीन,बांग्लादेश आदि पर विश्वास करना भारत सरकार  अविलम्ब बंद कर दे अन्यथा चीन की ओर से भारत को कभी भी कोई भी बड़ी से बड़ी चोट दी जा सकती है भारत सरकार को चाहिए कि अगले 6 महीने के लिए चीनसे किसी भीप्रकार की न कोई मेल मिलाप संबंधी बात करे और न ही चीन की किसी बात पर भरोसा करे" ।     हमारे द्वारा अपने ब्लॉग पर लिखी गई यह वैदिक भूकंपीय सूचना भी सच साबित हुई है क्योंकि इस भूकंप के बाद वर्षा और बाढ़ अचानक घट गई थी और चीन के साथ संबंधों में भी उत्तेजना बढ़ने लग गई थी !


भूकंप -25-3-2017 म्यामार में 7.5बजे तीव्रता 5.0 केंद्र म्यांमार-भारत सीमा क्षेत्र ! 'सन्निपातज ' ! 
भूकंप का फल -आकाश में बड़े बड़े काले काले गंभीर शब्द करने वाले बादल आने लगते हैं आवश्यकता के अनुशार वर्षा करते हैं । यह भूकंप मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री एवं वहाँ  के संगठन प्रमुखों के लिए सभी प्रकार से हानिकारक है इनकी सुरक्षा की विशेष चिंता की जानी चाहिए !वहाँ  के लोगों को कफ के रोगों से कष्ट प्रदान करने वाला है !   

 नेपाल और म्यांमार में भूकंप 'वातज' 2-7-2017 \ रविवार को 7.28 AM \ तीव्रता 4.9 एवं 10 :49 AM बजे भी !
 यह भूकंप नेपाल,म्यांमार और भारत सीमा में आया इसका मुख्य केंद्र  म्यांमार-भारत सीमा रहा. 
 अब देखिए इस भूकंप का फल !    इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !   शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा  पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !     साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं ऐसे भूकंपों का प्रभाव तो 2-12-2017दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता चला जाता है तब भी 17-8-2017 का समय विशेष भारी होगा ।इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र को तब तक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ आतंकवादी समस्याओं से भी विशेष सावधान रहना होगा ! सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है कि इस क्षेत्र में कोई तनाव न तैयार होने पाए !






चीन -

2016-08-31 सुबह तड़के PAK-चीनभूकंप के ज़बरदस्त झटकों से 'थर्राया'
      31 अगस्त 2016 से भारत के विरुद्ध चीन और पकिस्तान के संयुक्त प्रयास प्रारम्भ होंगे जिनसे भारत को बड़ा नुक्सान पहुँचा सकते हैं !इसलिए सरकार  को बहुत सतर्क रहना चाहिए फरवरी 2017 तक पाकिस्तान और चीन मिलकर कोई बड़ा षड्यंत्र कर सकते हैं भारत के खिलाफ !इसलिए इस समय के बीच भारत सरकार  को  भी बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए !
       इस  भूकंप के प्रभाव से चीन और पाकिस्तान के लोगों में आपसी शांति का कारक होगा दोनों देशों आपसी मित्रता बढ़ेगी ।इस भूकंप के प्रभाव से यहाँ के लोगों के बीच आपसी भाईचारे की भावना का निर्माण हो!लोगों के बीच आपसी संबंध सामान्य बनाने के प्रयास फलीभूत होंगे ! सहन शीलता बढ़ेगी इस भूकंप का फल आगामी 6 महीनों तक रहेगा !


  25\26 नवंबर 2016 रात 10.30 बजे आया चीन में भूकम्प !जानिए इसका असर !!  
                चीन में आया 'वातज'(चि) भूकंप !    भूकंप की तीव्रता रिक्‍टर पैमाने पर 6.9 रही है। इसका केंद्र चीन किर्गिस्‍तान और ताजिकिस्‍तान की सीमा पर एकटो काउंटी के करीब था।     यह वातज (अ) भूकंप होने के कारण लंबे भूभाग को प्रभावित करता है इसमें आफ्टर शख्स बहुत दिनों तक आ सकते हैं इस भूकंप का अंतिम झटका 10 जनवरी 2017 के आस पास उसी जगह पर आ सकता है जहाँ पहला आया था किंतु पहले की अपेक्षा धीरे धीरे कमजोर होता जाएगा बीच बीच में भी झटके आ सकते हैं !    इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !    शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा  पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।     डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !     साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं ऐसे भूकंपों का प्रभाव तो 180 दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता चला जाता है। इसलिए यह क्षेत्र प्रायः 180 दिनों तक तनाव युक्त वातावरण में ही जीता रहेगा !इतने दिनों तक यहाँ कैसे भी उपद्रव हो सकते हैं 

चीन में भूकंप ! 8-2-2017शाम सात बजकर 11 मिनट पर 4.9 तीव्रता ! 'वातज'     बीजिंग, 8 फरवरी (वार्ता) चीन के युन्नान प्रांत में भूकंप के झटकाें के कारण पांच लोग घायल हो गये। शिन्हुआ संवाद समिति ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया कि शाम सात बजकर 11 मिनट पर 4.9 तीव्रता का भूकंप आया।   इस भूकंप का फल -   इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !   शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा  पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।     डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों को दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !     साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं ऐसे भूकंपों का प्रभाव तो 180 दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता चला जाता है तब भी 47 दिन विशेष भारी होते हैं ।चीन को स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ आतंकवादी समस्याओं से भी विशेष सावधान रहना होगा ! इसलिए 22 -3-2017 तक ऐसी  परिस्थिति बनी रहेगी !इस क्षेत्र को आतंकवादी हमलों से विशेष सावधान रहना चाहिए ! सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है कि भूकंप क्षेत्र में कोई तनाव न तैयार होने पाए !

27-3-2017 \5.1AM को चीन में 'पित्तज' भूकंप ! 5.1 तीव्रता !
 दक्षिण पश्चिमी चीन में स्थित यांग्बी काउंटी में आज 5.1 तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए. युन्नान प्रांत की यांग्बी काउंटी के एक प्रचार अधिकारी वांग कैशुन ने कहा कि भूकंप का केंद्र देश के अजिया और पुपिंग गांवों में था.
अब जानिए क्या है इस भूकम्प का फल -   भूकंपीय क्षेत्र में अग्नि सम्बन्धी समस्याएँ बहुत अधिक भी बढ़ सकती हैं इस समय भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है । इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं ।      इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि का जलस्तर तेजी से घटेगा !पित्त अर्थात गर्मी से संबंधित रोगों से सतर्क रहना चाहिए !      यहीं से शुरू होकर चंबा में लोगों के आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे निकट भविष्य में अशांति संभव है लोगों के आपसी सम्बन्धों में कटुता बढ़ती चली जाएगी !उचित होगा कि 13 -5 - 2017 तक लोगों के आपसी विश्वास को बढ़ाए  और बनाए रखा जाए ।    इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बढ़ने की सम्भावना है !इसका विशेष दुष्प्रभाव अभी से लेकर13 -5 - 2017तक रहेगा किंतु जैसा जैसा समय बीतता जाएगा वैसा वैसा घटता जाएगा दुष्प्रभाव !

चीन में भूकंप ,11-5-2017 को सुबह 5.58 बजे ,तीव्रता 5.4 \'पित्तज '
चीन के पश्चिमी क्षेत्र शिजियांग में गुरुवार को 5.4 तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए जिसके कारण आठ लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य लोग घायल हो गए. भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह पांच बजकर 58 मिनट पर आया. 
 अब जानिए क्या है इस भूकम्प का फल -
  भूकंपीय क्षेत्र में अग्नि सम्बन्धी समस्याएँ बहुत अधिक भी बढ़ सकती हैं इस समय भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है । इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं ।
     इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि का जलस्तर तेजी से घटेगा !पित्त अर्थात गर्मी से संबंधित रोगों से सतर्क रहना चाहिए !
     यहीं से शुरू होकर चंबा में लोगों के आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे निकट भविष्य में अशांति संभव है लोगों के आपसी सम्बन्धों में कटुता बढ़ती चली जाएगी !उचित होगा कि  27   -6  - 2017 तक लोगों के आपसी विश्वास को बढ़ाए  और बनाए रखा जाए ।
    इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बढ़ने की सम्भावना है !इसका विशेष दुष्प्रभाव अभी से लेकर
27  -6  - 2017तक रहेगा किंतु जैसा जैसा समय बीतता जाएगा वैसा वैसा घटता जाएगा दुष्प्रभाव !

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