असम - (कोकराझार) में - 020 -1 - 2018 \ को सुबह 6 .44 'चंद्रज' भूकंप ! तीव्रता 5.2!!

इस भूकंप का फल - 

       इस समय भूकंप की सूचना के अनुशार इस क्षेत्र में  लम्बे समय से चलते आ रहे संघर्ष  को घटाने के प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं जिनमें सफलता मिलने की संभावना विशेष अधिक होगी !अंडमान निकोबार और म्यांमार  की दक्षिणी सीमा में रहने वाले लोगों की मानसिकता यहाँ से बदलने का संकेत देता है यह भूकंप |स्थानीय लोगों  में इस समय उन्माद की मात्रा अत्यंत घटती चलीजाएगी | म्यांमार के दक्षिणी भाग से सामान्य रूप से अगले 6 महीनों तक धीरे धीरे यहाँ का वातावरण शांतिप्रिय बनता चला जाएगा ! 
      प्राचीन विज्ञान के हिसाब से चंद्र किरणों के प्रभाव से यह भूकंप प्रकट हुआ है 'चन्द्रज' भूकंप होने के कारण इसमें वर्षा और बाढ़ से सतर्कता बरती जानी चाहिए  नदी सरोवरों में जल की वृद्धि होगी नदी सरोवरों के आस पास रहने वाले लोगों में जल जनित बीमारियों का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाएगा ! भूकंप का केंद्र चंद्र से संबंधित है इसलिए नेपाल एवं उससे जुड़ी हुई भारत सीमा में पड़ने वाले नदियों तालाबों के किनारे और ऐसे जल के संपर्क में अधिक रहने वाले लोग जल जनित बीमारियों के शिकार होंगे !
   इन क्षेत्रों में तालाब आदि के संपर्क में रहने वाले लोग नहाने धोने एवं पीने के पानी का भी विशेष सतर्कता से प्रयोग करें क्योंकि उसका असर विपरीत होने की अधिक संभावनाएँ रहेंगी !सीमा पर तैनात सैनिकों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए |2  -3 -2018 तक के लिए वातावरण शांत हो जाएगा ! भारत पाक सीमा पर ये शांति22 -07 -2018 तक रहेगी !
     इसी समय तक जलजनित कई बड़ी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं यहाँ रहने वाले लोग ! कुल मिलाकर पानी के प्रदूषण से प्रदूषित वायु का स्पर्श होने से भी हो सकती हैं उल्टी दस्त एवं ज्वर जैसी अधिक दिनों तक चलने वाली कई बड़ी बीमारियाँ सरकार इनसे बचाव के लिए समय रहते यदि सचेत नहीं हो सकी तो उपर्युक्तसमय तक ये बीमारियाँ सरकार के नियंत्रण से बाहर भी जा सकती हैं पानी के किनारे रहने वाली जनता इन्हीं बीमारियों से  विशेष परेशान होगी | 
     इस भूकंप  से नदी के किनारे बसने वाले लोगों की क्षति होगी । जल जनित बीमारियों जैसी बड़ी बाधाएँ निकट भविष्य में अधिक होना संभव हैं।इस भूकंप का विशेष प्रभाव
2  -3 -2018 तक रहेगा !भारत पाक सीमा पर ये शांति 22 -07 -2018 तक रहेगी ! किंतु जैसे जैसे समय बीतता जाएगा वैसे वैसे भूकंप का प्रभाव घटता जाएगा और भूकंप से सम्बंधित कही गई बातें भी सामान्य होती चली जाएँगी !  

   इस  क्षेत्र में जलजनित गैसों के प्रकोप से ये भूकम्प आया  है और उन्हीं गैसों के प्रकोप से ज्वर आदि बीमारियाँ अचानक बढ़ती चली जाएँगी !जैसे जैसे समय बीतेगा वैसे वैसे स्थिति सामान्य  होती जाएगी | 
      पुनः  इस भूकंप  से नदी के किनारे बसने वाले लोगों की बहुत बड़ी क्षति होगी । जल जनित बीमारियों से बचने के लिए नदी तालाब आदि के जलों के संपर्क में रहने से अधिक से अधिक बचने का प्रयास करें

भूकंप-जालोर (राज.)12-1-2018 \प्रातः, ,'सूर्यज' भूकंप !

अब जानिए क्या है इस भूकम्प का फल -

  इस भूकंपीय क्षेत्र में अग्नि सम्बन्धी समस्याएँ बहुत अधिक भी बढ़ सकती हैं इस समय भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है इसलिए कभी भी कहीं भी आग लगने की दुर्घटनाएँ घट सकती हैं कुएँ तालाब नदियाँ आदि बहुत जल्दी सूखने लगेंगी !वर्षा की संभावनाएँ अत्यंत कमजोर हो जाएंगी भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में अगले 50 दिनों तक वर्षा की संभावनाएँ बिल्कुल न के बराबर होंगी !
     गर्मी से संबंधित रोग विशेष रूप से पनपेंगे  इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं ।
     इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि का जलस्तर तेजी से घटेगा !पित्त अर्थात गर्मी से संबंधित रोगों से सतर्क रहना चाहिए !
     यहीं से शुरू होकर इस क्षेत्र में लोगों के आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे लोग एक दूसरे के साथ मरने मारने पर उतारू हो जाएंगे निकट भविष्य में अशांति संभव है लोगों के आपसी सम्बन्धों में कटुता बढ़ती चली जाएगी !भारत चीन और तिब्बत तीनों देशों के बीच आपसी तनाव बढ़ता चला जाएगा!तीनों देशों की सरकारों को संयम का परिचय देना चाहिए एवं आपसी सभी प्रकार के विवादित मुद्दों को यहीं रोका जाए अन्यथा कभी भी कहीं भी कितना भी बड़ा तनाव तैयार हो सकता है !उचित होगा कि 27 -2 - 2018 तक लोगों के आपसी विश्वास को बढ़ाए  और बनाए रखा जाए ।वैसे तो इस भूकंप का दुष्प्रभाव 15 -06 -2018तक रहेगा इसलिए सरकार की ओर से भी विशेष  सावधानी बरती जानी चाहिए  !
    इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बढ़ने की सम्भावना है !इसका विशेष दुष्प्रभाव अभी से लेकर27 -2 - 2018 ततक रहेगा किंतु जैसा जैसा समय बीतता जाएगा वैसा वैसा घटता जाएगा दुष्प्रभाव !

भूकंप-म्यांमार में 11-1-2018 \रात्रि में ,तीव्रता 6.9 ,'सूर्यज' भूकंप !

अब जानिए क्या है इस भूकम्प का फल -

  इस भूकंपीय क्षेत्र में अग्नि सम्बन्धी समस्याएँ बहुत अधिक भी बढ़ सकती हैं इस समय भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में वायुमण्डल में व्याप्त है अग्नि !इसलिए अग्नि से सामान्य वायु भी इस समय ज्वलन शील गैस जैसे गुणों से युक्त होकर विचरण कर रही है इसलिए कभी भी कहीं भी आग लगने की दुर्घटनाएँ घट सकती हैं कुएँ तालाब नदियाँ आदि बहुत जल्दी सूखने लगेंगी !वर्षा की संभावनाएँ अत्यंत कमजोर हो जाएंगी भूकंप से प्रभावित क्षेत्र में अगले 50 दिनों तक वर्षा की संभावनाएँ बिल्कुल न के बराबर होंगी !
     गर्मी से संबंधित रोग विशेष रूप से पनपेंगे  इसके अलावा इस समय दिशाओं में जलन, तारे टूटना ,उल्कापात होने जैसी घटनाएँ भी देखने सुनने को मिल सकती हैं ।
     इस भूकंप के कारण ही नदियाँ कुएँ तालाब आदि का जलस्तर तेजी से घटेगा !पित्त अर्थात गर्मी से संबंधित रोगों से सतर्क रहना चाहिए !
     यहीं से शुरू होकर इस क्षेत्र में लोगों के आपसी सम्बन्ध दिनोंदिन तनाव पूर्ण होते चले जाएँगे लोग एक दूसरे के साथ मरने मारने पर उतारू हो जाएंगे निकट भविष्य में अशांति संभव है लोगों के आपसी सम्बन्धों में कटुता बढ़ती चली जाएगी !भारत चीन और तिब्बत तीनों देशों के बीच आपसी तनाव बढ़ता चला जाएगा!तीनों देशों की सरकारों को संयम का परिचय देना चाहिए एवं आपसी सभी प्रकार के विवादित मुद्दों को यहीं रोका जाए अन्यथा कभी भी कहीं भी कितना भी बड़ा तनाव तैयार हो सकता है !उचित होगा कि 27 -2 - 2018 तक लोगों के आपसी विश्वास को बढ़ाए  और बनाए रखा जाए ।वैसे तो इस भूकंप का दुष्प्रभाव 15 -06 -2018तक रहेगा इसलिए सरकार की ओर से भी विशेष  सावधानी बरती जानी चाहिए  !
    इतना ही नहीं अपितु इस भूकंप के दुष्प्रभाव से शरीर में जलन की बीमारियाँ बढ़ेंगी, तरह तरह के ज्वर फैलेंगे बिचर्चिका और बिसर्पिका जैसी त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ एवं पीलिया रोग निकट भविष्य में बढ़ने की सम्भावना है !इसका विशेष दुष्प्रभाव अभी से लेकर27 -2 - 2018 ततक रहेगा किंतु जैसा जैसा समय बीतता जाएगा वैसा वैसा घटता जाएगा दुष्प्रभाव !

भूकंप:हिमाचल प्रदेश कांगड़ा में 9-1-2018 को सायं 6.25 पर 'वातज' भूकंप ! तीव्रता 3.0

  जानिए इस भूकंप का फल -

इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों में अब अचानक पागलपन सवार होगा ,उन्माद आतंकवाद आदि उपद्रवों में जन भागीदारी देखने को मिलने लगेगी |सरकार को विशेष सावधानी वर्तनी चाहिए ! इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !
  शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा सामूहिक पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।
  डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों में दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !
      साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं इस भूकंप का प्रभाव तो 200 दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता चला जाता है तब भी 20-2-2018 तक का समय विशेष भारी होगा और  3-7-2018 परेशान करता रहेगा ।इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र को तब तक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ आतंकवादी समस्याओं से भी विशेष सावधान रहना होगा !सामाजिक दंगे न बढ़ने पाएँ ध्यान रखा जाना चाहिए इस भूकंप का आना इस क्षेत्र में तनाव तैयार करने का कारण बन सकता है !

भूकंप:भारत म्यांमार सीमा पर मणिपुर में 7-1-2018 को दोपहर 12.17 पर 'वातज' भूकंप ! तीव्रता 6.0

  जानिए इस भूकंप का फल -

इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों में अब अचानक पागलपन सवार होगा ,उन्माद आतंकवाद आदि उपद्रवों में जन भागीदारी देखने को मिलने लगेगी |सरकार को विशेष सावधानी वर्तनी चाहिए ! इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !
  शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा सामूहिक पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।
  डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों में दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !
      साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं इस भूकंप का प्रभाव तो 200 दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता चला जाता है तब भी 20-2-2018 तक का समय विशेष भारी होगा और  3-7-2018 परेशान करता रहेगा ।इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र को तब तक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ आतंकवादी समस्याओं से भी विशेष सावधान रहना होगा !सामाजिक दंगे न बढ़ने पाएँ ध्यान रखा जाना चाहिए इस भूकंप का आना इस क्षेत्र में तनाव तैयार करने का कारण बन सकता है !

भूकंप: ठाणे (महाराष्ट्र):में 2-1-2018 को प्रातः 2.21 पर 'वातज' भूकंप ! तीव्रता 3.2

  ठाणे (महाराष्ट्र):में  गुरुवार शाम भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। अब जानिए इस भूकंप का फल -
  ठाणे (महाराष्ट्र):के भूकंप प्रभावित क्षेत्र के लोगों में अब अचानक पागलपन सवार होगा ,उन्माद आतंकवाद आदि उपद्रवों में जन भागीदारी देखने को मिलने लगेगी |सरकार को विशेष सावधानी वर्तनी चाहिए ! इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !
  शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा सामूहिक पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।
  डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों में दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !
      साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं इस भूकंप का प्रभाव तो 200 दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता चला जाता है तब भी 20-2-2018 तक का समय विशेष भारी होगा और  3-7-2018 परेशान करता रहेगा ।इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र को तब तक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ आतंकवादी समस्याओं से भी विशेष सावधान रहना होगा !सामाजिक दंगे न बढ़ने पाएँ ध्यान रखा जाना चाहिए इस भूकंप का आना इस क्षेत्र में तनाव तैयार करने का कारण बन सकता है !

भूकंप: देहरादून में 28-12-2017 को प्रातः 4 .47 पर 'वातज' भूकंप ! तीव्रता 4.7

 देहरादून
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में गुरुवार शाम भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए।उत्तराखंड में भूकंप प्रभावित क्षेत्र हैं गढ़वाल में रुद्रप्रयाग, कुमाऊँ में बागेश्वर और पिथौरागढ़. !रुद्रप्रयाग में गुरुवार शाम 4 बजकर 47 मिनट पर लोगों को भूकंप के झटके महसूस हुए। रुद्रप्रयाग के अलावा उत्तराखंड के कुछ अन्य जिलों और श्रीनगर में भी हल्के झटके महसूस किए गए।  भूकंप का केंद्र चमोली जिले में बताया जा रहा है, इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.7 मापी गई।
   इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों में अब पागलपन सवार होगा ,उन्माद आतंकवाद आदि उपद्रवों में जन भागीदारी देखने को मिलने लगेगी |सरकार को विशेष सावधानी वर्तनी चाहिए ! इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के आकाश में धुआँ धुँआ सा दिखाई पड़ने लगेगा तेज हवाएँ चलना भी संभव है आँधी तूफान का प्रकोप भी बढ़ सकता है ! सूर्य की किरणें भी धूमिल दिखेंगी अनाज, जल और औषधियों का नाश होगा !
  शरीरों में सूजन ,दमा एवं खाँसी से उत्पन्न पीड़ा बढ़ने  लगेगी  ।ज्वर रोग तथा सामूहिक पागलपन की परेशानियाँ बढ़ेंगी इस क्षेत्र के अच्छे खासे शिक्षित और समझदार लोग भी न केवल पागलों जैसी दलीलें देते दिखेंगे अपितु उपद्रवी गतिविधियों में सम्मिलित होने में भी गर्व महसूस  करेंगे ।
  डॉक्टरों ,सैनिकों, महिलाओं नाचने गाने वालों ,फिल्मी कलाकारों एवं कारीगरों और व्यापार करने वाले लोगों पर विशेष भारी है ये भूकंप !ऐसे भूकंप से प्रभावित क्षेत्र के लोगों में दिमागी चक्कर आने की बीमारियाँ बढ़ती हैं अचानक ऐसा गुस्सा आता है कि मरने मारने को उतारू हो जाते हैं इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के लोग !
      साँस फूलने संबंधी बीमारियाँ भयंकर रूप लेती जाती हैं इस भूकंप का प्रभाव तो 200 दिनों का होता है किंतु जैसे जैसे समय बीतता है वैसे वैसे घटता चला जाता है तब भी 15-2-2018 का समय विशेष भारी होगा और  30-6-2018 परेशान करता रहेगा ।इस भूकंप से प्रभावित क्षेत्र को तब तक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ आतंकवादी समस्याओं से भी विशेष सावधान रहना होगा !सामाजिक दंगे न बढ़ने पाएँ ध्यान रखा जाना चाहिए !कल नई सरकार बनी  है और आज ही इस भूकंप का आना इस क्षेत्र में तनाव तैयार करने का कारण बन सकता है !

भूकंप 23-12- 2017 को भारत-म्यांमार सीमा पर रात 9 बजकर 15 मिनट परतीव्रता 4.9 'कफज' भूकंप

मणिपुर: आज रात भारत-म्यांमार सीमा पर भूकंप के झटके महसूस किए गए है। भारत-म्यांमार सीमा पर शनिवार रात 9 बजकर 15 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए।
 अब जानिए इस भूकंप का फल-

   इस भूकम्प से प्रभावित क्षेत्र में वर्षा बाढ़ का प्रकोप विशेष बढ़ सकता है नदियों तालाबों एवं समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों के लिए विशेष हानिकारक हो सकता है इसमें कफज एवं जलजनित बीमारियाँ अधिक बढ़ सकती हैं अतिवृष्टि और बाढ़ से परेशानियाँ बढ़ सकती हैं !इनसे निपटने के लिए सावधानी और सतर्कता तो रखी ही जानी चाहिए ! 

    इस भूकंप के प्रभाव से पड़ोसी बांग्लादेश और त्रिपुरा आदि भूकंप प्रभावित क्षेत्र में वर्षा बाढ़ एवं जल जनित बीमारियों की बड़ी सम्भावना है इसके साथ साथ इस भूकंप का एक बहुत अच्छा फल यह भी है कि इस क्षेत्र के लोगों और देशों के आपसी संबंधों में मधुरता आएगी । इस भूकंप से  प्रभावित लोग और देश सभी प्रकार के आपसी शिकायत शिकवे भुलाकर आपस में मिलजुल कर शांति पूर्ण ढंग से काम करना पसंद करेंगे !इस क्षेत्र की आम जनता में भी हिंसा मुक्त वातावरण बनेगा भारत और म्यांमार  के आपसी संबंधों के लिए भी ये भूकंप बहुत उत्तम होगा !लोगों की मानसिकता एक दूसरे के प्रति संवेदन शील और सात्विक बनेगी !इस भूकंप का असर वैसे तो 5 -2 - 2018 तक विशेष रहेगा इसके बाद धीरे धीरे घटता चला जाएगा !जबकि इसका सामान्य असर तो 25-6-2018  तक रहेगा !

        इस क्षेत्र  की सरकारों को चाहिए कि इस बीच आपसी विवादित मुद्दों को निपटाकर एक दूसरे के सहयोग से आपसी विकास के लिए मजबूत महत्वपूर्ण रास्ते खोजें !इन विषयों में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है !

      इस समय इस  क्षेत्र में इसके बाद पूर्ण सुख शांति युक्त वातावरण का निर्माण होगा !

भूकंप -मंडी (हिमाचल)22-12-2017 4.53 PMबजे, 'सन्निपातज'

इस भूकंप का फल -  

2017 में प्रदूषण सबसे अधिक कब कब ?

"मौसम का भी रहा असर :
सी.पी.सी.सी. के वैज्ञानिक सुशील डोगरा की मानें तो वायु प्रदूषण बढऩे की  मुख्य वजह केवल दीवाली की रात को बजाय गए पटाखों को ही नहीं कहा जा सकता है, बल्कि इसमें मौसम का अहम रोल रहा। पिछले काफी दिनों से शहर में बारिश नहीं हुई इसके अतिरिक्त पंजाब के गांव में पराली को भी जलाया जा रहा है, जिसकी वजह से हवा में धुआं काफी था। ये भी वायु प्रदूषण का कारण बनी।"



विश्व के अधिकांश प्रदूषित शहर
सूक्ष्म (Particulate)
पदार्थ
μg/m³ (२००४)
नगर
१६९ काहिरा, मिस्र (Cairo, Egypt)
संरेखण = केन्द्र १५० दिल्ली, भारत
१२८ कोलकाता, भारत (कलकत्ता)
१२५ तिआनजिन, चीन
१२३ चूंगचींग, चीन (Chongqing, China)
१०९ कानपुर, भारत
संरेखण = केन्द्र १०९ लखनऊ, भारत
१०४ जकार्ता, इंडोनेशिया
१०१ शेनयांग, चीन (Shenyang, China)
वायु प्रदूषण आमतौर पर महानगरीय क्षेत्र घनी आबादी में, विशेष रूप से